देहरादून: कांग्रेस के 15 विधायकों के निलंबन की कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने सरकार पर निशाना साधा है. दसौनी ने कहा कि भाजपा कितने भी बहाने बना ले, हकीकत यह है कि राज्य की राजनीति में जिस तरह से नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है, उसके चलते भाजपा नेता गैरसैंण में नहीं रहना चाहते हैं।
सच्चाई यह है कि भाजपा के अधिकांश मंत्री और विधायक दिल्ली जाकर अपने चहेतों के पक्ष में पैरवी करना चाहते हैं और इसी मंशा के चलते विपक्ष के 14 विधायकों को बिना किसी आधार के निलम्बित कर दिया गया है और अपमानजनक आरोप लगा रहे हैं. वह अपने आप में अद्भुत है ।
दसोनी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि मुख्य विपक्षी दल के विधायक सत्ता पक्ष के मंत्रियों के कच्चे होमवर्क और आधे अधूरे जवाबों से नाराज होकर वेल में आए हो या विरोध प्रदर्शन कर रहे हो ।
सत्र के दौरान इस तरह के विरोध प्रदर्शन ज्यादातर विधानसभाओं में आम हैं, लेकिन 14 विधायकों का निलंबन कहीं न कहीं पक्षपात की पोल खोल देता है. दसौनी ने कहा कि भाजपा लगातार लोकतंत्र और संविधान की हत्या करने पर तुली हुई है क्योंकि संविधान मुख्य विपक्षी दल के विधायकों को विरोध का अधिकार देता है और यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी नेताओं ने ऐसा किया है.
दासोनी ने कहा कि दाल में काला है और हकीकत यह है कि अब भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता खुद को गैरसैंण और दिल्ली के बीच बंटा हुआ महसूस कर रहे हैं.
लगभग सभी लोग हाईकमान के सामने अपनी पसंद के नेता की पैरवी करने के लिए दिल्ली पहुंचना चाहते हैं यही कारण है की एक तरफ सत्र है और दूसरी तरफ नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट ।
दसौनी ने कहा कि विपक्षी विधायकों को सोची समझी रणनीति के तहत सदन से निलंबित किया गया है. दसोनी ने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस निलंबन का पुरजोर विरोध करती है।

