विकासनगर : जौनसार बावर आदिवासी अंचल में इन दिनों बिस्सू पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. मसराड गांव में रविवार को शिलगुर देवता का जात्रा पर्व मनाया गया। गांव की बहू-बेटियों ने भगवान को चांदी का छत्र भी चढ़ाया।
धूमधाम से मनाया जा रहा बिस्सू पर्व जौनसार बावर आदिवासी अंचल अपनी अनूठी संस्कृति के लिए देश में अपनी पहचान बनाए हुए है. जौनसार बावर के मसराड गांव के शिलगुर देवता मंदिर में बिस्सू की जात्रा उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. उत्सव में गांव की लड़कियों द्वारा चांदी की छतरी भी भेंट की गई।
खट पट्टी सिली के 12 गांवों के लोग बिस्सू जात्रा पर्व के अवसर पर शिलगुर मंदिर से भगवान की डोली और भगवान के प्रतीक ले कर सरदारों के दर्शन के लिए विधि पूर्वक पूजा अर्चना कर देव डोली व देव चिन्हों को मंदिर से बाहर निकाला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
बहू-बेटियों ने शिलगुर देवता को चढ़ाया चांदी का छत्र: वहीं गांव की रांजली चौहान ने बताया कि गांव की सभी विवाहित और अविवाहित लड़कियों ने शिलगुर देवता को चांदी का छत्र चढ़ाया था. हम शिलगुर देवता से प्रार्थना करते हैं कि वे गांव, खाट और पूरे देश और दुनिया को सुख-शांति प्रदान करें। यह इच्छा है। वहीं ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने कहा कि यह हमारी पौराणिक परंपरा है। शिलगुर देवता मंदिर में बिस्सू उत्सव बिस्सू जात्रा के रूप में मनाया जाता है।
देश में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं श्रद्धालु : शिलगुर मंदिर समिति के अध्यक्ष रूपराम राठौड़ ने बताया कि खटपट्टी सिल्ली के 12 गांवों द्वारा मंदिर की स्थापना की जा रही है. बिस्सू पर्व पर देवता की डोली श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ मंदिर से बाहर निकाली जाती है। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और भक्त देवी के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।


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