महाराष्ट्र में करीब एक साल से चल रही राजनीतिक उठापटक आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खत्म हो गई है। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया। उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। ऐसे में कोर्ट इस्तीफा रद्द नहीं कर सकता है। हम पुरानी सरकार को बहाल नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट को भी अमान्य कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पिछले साल 30 जून को महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बुलाना राज्यपाल के लिए उचित नहीं था. हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए यथास्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया कि ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा दे दिया था।

महाराष्ट्र में पिछले साल शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिरने और सामने आये राजनीतिक संकट से जुड़ी अनेक याचिकाओं पर सर्वसम्मति से अपने फैसले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि शिंदे गुट के भरत गोगावाले को शिवसेना का व्हिप नियुक्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ‘अवैध’ था।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चूंकि ठाकरे ने विश्वास मत का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था, इसलिए राज्यपाल ने सदन में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कहने पर शिंदे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था।

पीठ में न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारि, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा शामिल रहे। उसने कहा, ‘‘सदन में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल का ठाकरे को बुलाना उचित नहीं था क्योंकि उनके पास मौजूद सामग्री से इस निष्कर्ष पर पहुंचने का कोई कारण नहीं था कि ठाकरे सदन में बहुमत खो चुके हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, पूर्व स्थिति बहाल नहीं की जा सकती क्योंकि ठाकरे ने विश्वास मत का सामना नहीं किया और इस्तीफा दे दिया था।” इसलिए सदन में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के इशारे पर शिंदे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का राज्यपाल का फैसला सही था.

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