भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने इसमें भाग लिया था। भारत के अलावा, जापान ने जिन आठ सहयोगी देशों को आमंत्रित किया है, उनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कोमोरोस, कुक इजलेंड, इंडोनेशिया, कोरिया तथा वियतनाम शामिल हैं।

जल्द ही भारत को भी दुनिया के ताकतवर देशों के जी-7 ग्रुप में एंट्री मिल सकती है। जापान में 19-21 मई की बैठक के दौरान समूह के विस्तार पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत, चीन और ब्राजील को समूह में शामिल करने और इसे G-10 या D-10 कहने के लिए G-7 देशों के बीच बातचीत चल रही है।

G-7 में वर्तमान में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इस ग्रुप की शुरुआत साल 1975 में हुई थी। तब यह जी-6 हुआ करता था। कनाडा बाद में शामिल हो गया। पहले इसमें रूस भी था, लेकिन 2014 में क्रीमिया पर आक्रमण के कारण हटा दिया गया था। वर्तमान G-7 समूह में विश्व की अर्थव्यवस्था का 45 प्रतिशत हिस्सा शामिल है, सिर्फ दस फीसदी आबादी को कवर करता है। इसलिए इसके विस्तार की आवश्यकता महसूस की गई है।

इसे भारत, चीन और ब्राजील जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं सहित G-10 या D-10 (डेमोक्रेसी-10) नाम देने का प्रस्ताव है। हालांकि, अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। जी-7 का मुख्य फोकस दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने पर है, खासकर शांति निर्माण, सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, शिक्षा-स्वास्थ्य और पर्यावरण के मुद्दे, जबकि जी-20 अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा फोकस करता है।

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