हिमालय क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शनिवार को ब्रह्ममुहूर्त पर धार्मिक परंपरा के अनुसार खोले गए। इस बीच करीब 500 श्रद्धालु मंदिर के कपाट खुलते देखने पहुंचे थे। अब श्रद्धालु छह महीने तक भगवान शिव के मुख के दर्शन कर सकेंगे। रुद्रनाथ मंदिर को गेंदे के फूलों से सजाया गया है।

रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से 11808 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सुबह पुजारी जनार्दन प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में भक्तों ने नारद कुंड में स्नान किया और भगवान रुद्रनाथ के जलाभिषेक के लिए जल लेकर आए। सुबह 6.10 बजे पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रुद्रनाथ मंदिर के कपाट खोले। भोलेनाथ के अभिषेक के बाद कपाट खुलते ही बुगियाली को फूलों से सजाया गया।

इसके बाद आम श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा अर्चना की। मान्यता है कि भारत में एकमात्र चौथे केदार रुद्रनाथ धाम में शिव का मुख देखा जा सकता है। शास्त्रों में माना जाता है कि रुद्रनाथ की तीर्थ यात्रा पर जा रहे पांडवों को शिव ने अपने मुख के दर्शन दिए थे।रुद्रनाथ यात्रा को अगम्य माना जाता है। रुद्रनाथ की 19 किमी की यात्रा सागर गांव से शुरू होती है, जो गोपेश्वर में मंडल-चोपता राजमार्ग पर तीन किमी की दूरी तय करती है। इस यात्रा में पनार सहित अन्य मखमली बुग्याल, बर्फ से आच्छादित पर्वत श्रृंखला देखते बनती हैं।

भगवान रुद्रनाथ गुफा में विराजमान हैं
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग क्षेत्र में होने के चलते यहां पर दुर्लभ कस्तूरा मृत, स्नो लेपर्ड, भालू आदि वन्य जीव अपने प्राकृतिक आवास में विचरण करते हुए दिख सकते है। इस धार्मिक यात्रा के लिए सागर गांव से घोड़े और खच्चर भी मिलते हैं। इन दिनों पितृधार से आगे इस तीर्थ मार्ग पर भी बर्फ जम गई है।

हालांकि, रुद्रनाथ धाम में मंदिर के आसपास बर्फ नहीं है। भगवान रुद्रनाथ गुफा में विराजमान हैं। इस गुफा को मंदिर का रूप दिया गया है। कपाट खुलने के मौके पर संकल्प अभियान के सेनि कर्नल डीएस बर्तवाल, संकल्प अभियान के अध्यक्ष मनोज बिष्ट, संरक्षक मनोज तिवारी, संदीप रावत आदि मौजूद रहे. इस दौरान मंदिर के समीप श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया।

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