नैनीताल: सीआरवीआर रामनगर में दैणा होया खोली का गणेशाय के साथ ग्लोबल टाइगर डे का शुभारंभ हुआ. संस्कृति विभाग के सौजन्य से उत्तराखंड की अनूठी परंपरा झोड़ा, छपेली के कार्यक्रम के साथ रंगारंग सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की गई।

सीआरवीआर रामनगर में वैश्विक बाघ दिवस का आयोजन किया गया। विश्व बाघ दिवस बाघों के संरक्षण के लिए मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बाघ प्रजाति की घटती आबादी के बारे में जागरूकता पैदा करना है। इस अवसर पर बाघों के राज्यवार आंकड़े जारी किए गए और बाघ संरक्षण और प्रजनन पर तीन रिपोर्ट भी जारी की गईं। इसके साथ ही भारत के 06 टाइगर रिजर्व को ग्लोबल कैट्स एक्रीडेशन सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया।भारत भर में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उनके असाधारण और सराहनीय कार्य के लिए कुल 11 वन विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया गया, जिसमें सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के 02 जवानों को उनके काम के लिए मरणोपरांत सम्मानित किया गया।

वैश्विक बाघ दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली प्रतिभाग करते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन एवं वन्य जीवों का संरक्षण देवभूमि की संस्कृति एवं दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य हमारी संस्कृति है। यह उत्तराखंड की संस्कृति है जो हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है।हमें इको-टूरिज्म में स्थानीय समुदाय की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए होम स्टे, बर्ड वॉचिंग और अन्य गतिविधियों पर अधिक काम करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में बाघों की संख्या में वृद्धि पर उत्तराखंड की जनता, वन विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों तथा स्थानीय प्रतिभागियों को बधाई दी। इसमें कहा गया कि वर्ष 2018 में 442 बाघ थे, जो वर्ष 2022 तक बढ़कर 560 हो गये हैं.

मुख्यमंत्री ने देश भर के प्रख्यात वन्यजीव संरक्षणवादियों से कालाढूंगी स्थित जिम कॉर्बेट संग्रहालय देखने का अनुरोध किया। ऐसा कहा जाता है कि विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट ने अपना अधिकांश जीवन कालाढूंगी में बिताया। कालाढूंगी स्थित उनके पुराने घर को एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।

हम उत्तराखंडवासी पीढ़ियों से पर्यावरणविद् रहे हैं।

सीएम धामी ने कहा कि हम आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपरा का पालन कर रहे हैं, जो हमें सिखाती है कि हमें जानवरों, पेड़-पौधों के साथ सद्भाव से रहना चाहिए, क्योंकि वे सभी इस धरती पर हमारे साथ रहते हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिपको आंदोलन के नाम से मशहूर इस महिला सत्याग्रह ने दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को फिर से परिभाषित किया। हमने हाल ही में इस आंदोलन के 50 वर्ष पूरे किए हैं और आज इस मंच से मैं उन सभी सत्याग्रहियों को सलाम करता हूं जिन्होंने उस समय हमारे पेड़ों को बचाया था।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शीघ्र ही हल्द्वानी में वन्य जीव चिकित्सालय का शिलान्यास भी किया जायेगा। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों को कार्य के दौरान आने वाली चुनौतियों पर काम कर उनके समाधान का प्रयास करने को कहा. उन्होंने कहा कि वन्य जीव एवं मानव संघर्ष के मामलों में विभाग को शासन द्वारा प्रदत्त अनुमन्य सहायता स्वतः उपलब्ध करानी चाहिए ताकि पीड़ित पक्ष को अनावश्यक कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े।

उन्होंने बाघ के महत्व के बारे में कहा कि बाघ को स्थानीय समुदायों की आजीविका और सतत विकास का प्रतीक माना जाता है। इसे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक मानते हुए वैश्विक स्तर पर सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के लिए एक मानक के रूप में देखा जाता है।

केंद्रीय संरक्षण एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि वन्यजीव बाघों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण और प्रजनन के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।

भारत के विभिन्न बाघ रिजर्व से आये ईडीसी व स्वयं सहायता समूह ने भी इस कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों के स्टॉल प्रदर्शित किए। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया, विधायक रामनगर दीवान सिंह बिष्ट, भीमताल राम सिंह, नैनीताल सरिता आर्या,यमकेश्वर रेणु बिष्ट, महानिदेशक वन सीपी गोयल, सदस्य सचिव एनटीसीए डॉ ऐस पी यादव, आईजीएफ अमित मलिक, प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक, समीर सिन्हा, कुमाऊँ मुख्य वन संरक्षक पी के पात्रो, आईजी नीलेश आंनद भरणे आदि उपस्थित थे।

यमुना काण्डी पम्पिंग पेयजल योजना की उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा स्थलीय निरक्षण किया गया, कार्य मानकों की अनुरूप नही, दुबारे से काम होगा