शनिवार सुबह गौरीकुंड भूस्खलन से दो शव निकाले गए। इनमें से एक शव महिला का है, जबकि दूसरा शव एक युवती का है, जिसकी पहचान की जा रही है. 3 अगस्त को रात लगभग 11.30 बजे गौरीकुंड डाटपुल के पास भारी भूस्खलन के कारण हाईवे पर बनी तीन दुकानें भी बह गईं, जिसमें 23 लोगों की जान भी चली गई। जिसकी तलाश में गौरीकुंड में रेस्क्यू अभियान जारी है.
गौरीकुंड भूस्खलन आपदा में लापता हुए नेपाली मूल के 14 लोगों के मामले में जिला प्रशासन ने नेपाल दूतावास से भी जानकारी मांगी है। साथ ही यात्रा के दौरान अजनबियों के सत्यापन की रिपोर्ट भी पुलिस से मांगी गई है। छह दिन बाद भी नेपालियों व अन्य समेत कुल 20 लोगों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

मलबे में दबने से पांच लोगों की मौत हो गई।
उधर, गुरुवार को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबे में वाहन दबने से पांच लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को बुरी तरह क्षतिग्रस्त वाहन के अंदर से पांचों के शव निकाले गए। राजमार्ग का 80 मीटर से अधिक हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। नतीजतन दूसरे दिन भी यातायात बहाल नहीं हो सका।
शुक्रवार सुबह छह बजे से हाईवे के भूस्खलन प्रभावित हिस्से से मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। जेसीबी मशीनों से दोनों तरफ से भारी पत्थर और मलबा हटाया जा रहा है। शाम पांच बजे मलबा हटाते समय एक वाहन भी देखा गया। एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और होम गार्ड के जवानों ने प्रभावित क्षेत्र में बचाव अभियान शुरू किया और मलबा हटाकर वाहन को हटाया। बुरी तरह क्षतिग्रस्त कार के अंदर पांच शव मिले।


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