देहरादून, PAHAAD NEWS TEAM
कोरोना काल में अब तक देश के विभिन्न राज्यों से 97 हजार से ज्यादा प्रवासी उत्तराखंड लौट चुके हैं. ऐसे में राज्य सरकार लौटे प्रवासियों को रियायती मूल्य पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है. इसके तहत जिन प्रवासियों के पास राज्य खाद्य योजना के तहत राशन कार्ड नहीं है, उनके लिए प्राथमिकता के आधार पर राशन कार्ड बनाए जाएंगे। इस संबंध में खाद्य सचिव सुशील कुमार की ओर से सभी जिला आपूर्ति अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं.
जानकारी के अनुसार राज्य खाद्य योजना के माध्यम से वे प्रवासी लाभान्वित हो सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या इससे अधिक है. लेकिन ये लोग इनकम टैक्स के दायरे से बाहर हैं. इस योजना के तहत राशन कार्ड बनाने वाले लोगों को हर महीने ₹11 प्रति किलो के हिसाब से ढाई किलो चावल और 8.60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से 10 किलो गेहूं दिया जाता है ।
3 महीने के लिए 10-10 किलो गेहूं और चावल
हालांकि, कोरोना काल में राज्य सरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए अगले 3 महीने के लिए गेहूं और चावल की मात्रा 10-10 किलो कर दी है. ऐसे में राज्य खाद्य योजना के तहत राशन कार्ड बनाने वाले प्रवासियों को अगले 3 महीने यानी मई से जुलाई तक 10 किलो गेहूं और 10 किलो चावल दिया जाएगा. बता दें कि प्रदेश के सभी पहाड़ी और मैदानी जिलों में अब तक देश के विभिन्न राज्यों से कई प्रवासी प्रदेश लौट चुके हैं. अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक 30,590 प्रवासियों की वापसी हुई है। इसके अलावा पौड़ी में 21,694, नैनीताल में 7,820, देहरादून में 6,780, टिहरी में 6,608, उधमसिंह नगर में 5,110 और सबसे कम 796 प्रवासी उत्तरकाशी जिले में लौटे हैं।

