ट्रंचिंग ग्राउंड की भूमि को लेकर विवादों में घिरी काशीपुर नगर निगम की मेयर अब भले ही अपनी सफाई देकर पूरे मामले से पल्ला झाड रही हों, लेकिन नगर निगम की अगुवाई के बाद शासन और प्रशासन में दौड़ रही भूमि पर खनन की फाईल नगर निगम और मेयर को कई सवालों के घेरे में खडा करती है, वहीं आम आदमी पार्टी भी इस पूरे मामले की परत खुलकर सामने लाने के लिए जांच की मांग कर रही है। कुल मिलाकर कूड़े के खेल में नोटों का खेल कितना दिलचस्प होने वाला है, यह देखने वाली बात है।
आम आदमी पार्टी द्वारा नगर निगम मेयर पर लगाए गए आरोपों के बाद मेयर उषा चौधरी भी फ्रंट फुट पर आ गयी हैं , ट्रंचिंग ग्राउंड की भूमि को लेकर करोड़ों के उपखनिज के वारे न्यारे करने को लेकर चल रहे इस विवाद पर मेयर का कहना है कि इससे उनका कोई मतलब नहीं है। मामला शासन और नगर आयुक्त के बीच का है। जबकि निगम को विवादित भूमि की आवश्यकता भी नहीं है। वहीं मेयर ने कहा कि निगम की बैठक में कुछ वर्ष पूर्व ये प्रस्ताव रखा गया था कि किसी व्यक्ति द्वारा भूमि उपलब्ध करायी जा रही है, जिसका उपयोग ट्रंचिंग ग्राउंड के रूप में किया जा सकता है, जिसके लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हुआ है। उसके बाद निगम के आयुक्त और शासन के बीच में भूमि पर उपखनिज निकालने या उसमें किसी तरह के लाभ से उनका कोई मतलब नहीं है, और ना ही उनको इस पूरे मामले के बारे में जानकारी ही है।
मेयर उषा चौधरी ने आम आदमी पार्टी द्वारा लगाये जा रहे आरोपों को जहां सिरे से खारिज करते हुए खुली चुनौती देकर जांच की बात कही है वहीं आम आदमी पार्टी के नेता दीपक बाली ने कहा कि अगर मेयर का इस मामले से कोई मतलब नहीं है तो वो शासन को जांच के लिए पत्र लिखें। यही नहीं, दीपक बाली ने नया सबूफा छोडते हुए एक एसी चिठ्टी का जिक्र करते हुए मेयर पर निशाना साधा कि जब मेयर किसी व्यक्ति के लिए पार्टी मे टिकट के लिए पत्र लिख सकती हैं तो जांच कराने के लिए पत्र लिखने में भी उन्हें कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि अब मेयर साहिबा इस भूमि की ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए आवश्यकता भी नहीं बता रही है, तो जाहिर है कि जब नगर निगम को उक्त भूमि की जरूरत ही नहीं, तो फिर शासन और प्रशासन में दौड़ रही उपखनिज की फाइल भी रुकनी चाहिए थी, लेकिन इस पर भी मेयर साहिबा ने साफ तौर पर यू टर्न लेकर बोल दिया कि मेरा कोई मतलब नहीं और मैं क्यों मना करुँ या क्यों आपत्ति लगाई जाए। गौरतलब है कि मेयर का ये कहना कि उनको उपखनिज निकाले जाने के बारे पता नहीं, और उनकी ही नगर निगम की फाइल में शासन द्वारा पत्र व्यवहार होना उनकी जानकारी में नहीं होना, ये बात हाजमे से बाहर है, जबकि जिस भूमि पर पूरा विवाद है इसकी शुरुआत ही निगम द्वारा बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही उक्त भूमि पर खुदाई की अनुमति के लिए फाइल शासन और प्रशासन के बीच दौड़ने लगी। वहीं अब आम आदमी पार्टी द्वारा पुरे मुद्दे को राजनैतिक रंग देने के बाद क्या वास्तव में पूरे मामले की जांच हो पाती है। बहरहाल इस पुरे मामले में भले ही कलम किसी की भी चली हो, लेकिन दिमाग स्क्रीन के पीछे बैठे एसे लोगों ने जरुर चलाया है जो वास्तव में इस भूमि पर होने वाले नोटों के खेल के जानकार थे।