-अतिक्रमण मुक्त अभियान के दौरान अवैध होर्डिंग्स हटाये

देहरादून,

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अतिक्रमण पर प्रभावी कार्यवाई  के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी सोनिका के निर्देशन में  अतिक्रमणमुक्त अभियान के अन्तर्गत टीमों द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जा रही है। आराघर से नेहरूकालोनी  धर्मपुर, सहस्त्रधारा  आईटी पार्क, जीएमएस रोड, चकराता रोड-बल्लुपुर, जीएमएस रोड आदि स्थानों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। अतिक्रमण मुक्त अभियान के दौरान अवैध होर्डिंग्स भी हटाये गए।
  नगर निगम ने  93 चालान करते हुए रुपए 84800 के अर्थदंड की कार्रवाई की गई, पुलिस द्वारा लगभग 61चालान करते हुए, रुपए 29750 के अर्थदंड की कार्रवाई की गई। इसी प्रकार आरटीओ द्वारा लगभग 26 चालान करते हुए रुपए 13000 के अर्थदंड की कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी  ने  संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है, कि  अतिक्रमण के विरुद्ध नियमित अभियान चलाते हुए, फुटपाथ, सड़कों को अतिक्रमणमुक्त करें तथा किसी भी दशा में उन्हें पुनः अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण व किसी भी प्रकार की अवाछनीय गतिविधिया संचालित न होने दे।
      नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि , पहले ही उच्च न्यायालय के  उद्यान घोटालों की  सी0बी0आई0 जांच के आदेश से यह सिद्ध हो गया था कि, उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार की गंगा में सभी डुबकी लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि, इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में सरकार और शासन के सभी स्तरों की संदिग्ध भूमिका का उल्लेख किया गया था।  आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि सत्ता दल के रानीखेत विधायक द्वारा अपने कथित बगीचे में फर्जी पेड़ लगाने का प्रमाण पत्र निर्गत किया था । इससे पहले ही सिद्ध हो गया था कि, उत्तराखंड के  उद्यान घोटालों में केवल उद्यान निदेशक बबेजा ही लिप्त नहीं हैं बल्कि प्रदेश सरकार और भाजपा के विधायक व नेता भी सम्मलित हैं।
      यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि, पहले भी उच्च न्यायालय के द्वारा मामले की जांच  सी0बी0आई0 से करवाने की मंशा जाहिर करते ही राज्य सरकार ने आनन-फनान में  सी0बी0आई0 जांच का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था । उन्होंने साफ किया कि , राज्य के अधिकारी और एस0आई0टी0 जांच में नकारा सिद्ध हुए हैं इस उत्तराखण्ड लिए इस साल उच्च न्यायालय ने उद्यान घोटाले की जांच सहित  से संबधित तीन घोटालों की जांच सी0बी0आई0 को सोंपी हैं।  नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, सरकार के द्वारा अंतिम उपाय तक भ्रष्टाचारियों की जांच रुकवाने की कोशिश ओर उच्चतम न्यायालय द्वारा उत्तराखंड के उद्यान घोटाले कि जांच सी0बी0आई0 से करवाने के आदेश को बरकरार रखने से राज्य सरकार के ‘‘जीरो करप्शन माडल’’ की हकीकत सामने आ गयी है।  साथ ही यह भी सिद्ध हो गया है कि, प्रदेश की भाजपा सरकार और उसके अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं।