टिहरी | जाखधार (लालूर पट्टी)

टिहरी जनपद की लालूर पट्टी में सामाजिक सुधार की दिशा में एक अहम पहल करते हुए 21 दिसंबर 2025 को क्षेत्र के जाखधार स्थल पर सामाजिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और समाज में व्याप्त कुरीतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के प्रबुद्धजन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जबकि लालूर पट्टी के सभी गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भागीदारी की।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ कई सामाजिक परंपराओं में अनावश्यक विकृतियां आ गई हैं, जिससे आम लोगों पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए समाज सुधार के लिए ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता पर सर्वसम्मति बनी।

शादी-विवाह से जुड़ी परंपराओं पर अहम चर्चा

बैठक में विशेष रूप से विवाह समारोहों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। शादियों में मेहंदी कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और विवाह समारोहों में अंग्रेजी शराब पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति को बनाए रखने के उद्देश्य से स्थानीय पारंपरिक पेय ‘सुर’ के उपयोग पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं रखने पर सहमति बनी।

इसके साथ ही, शादी में मामा पक्ष (मौखी) पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए यह सुझाव दिया गया कि अब मौखी पक्ष की ओर से केवल एक बकरा और सामूहिक पिठाई ही दी जाएगी। इसके अलावा किसी भी प्रकार के अतिरिक्त उपहार या वस्तु के लेन-देन को अस्वीकार्य माना जाएगा।

बैठक में डीजे और साउंड सिस्टम के उपयोग के लिए निर्धारित समय सीमा तय करने को लेकर भी गहन चर्चा हुई, ताकि सामाजिक संतुलन और शांति बनी रहे।

21 गांवों की समिति गठित

बैठक में सामाजिक निर्णयों को ग्राम स्तर पर लागू करने के लिए 21 गांवों से दो-दो सदस्यों की एक संयुक्त समिति का गठन किया गया। समिति के सदस्य अपने-अपने गांवों में जाकर इन प्रस्तावों पर ग्रामीणों से चर्चा करेंगे और औपचारिक सहमति प्राप्त करेंगे।

28 दिसंबर को होगी अंतिम बैठक

बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम स्तर पर पुनर्विचार के बाद 28 दिसंबर 2025 को पुनः बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिए जाएंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किन-किन गांवों की इन सुधार प्रस्तावों पर सहमति बनती है और किन गांवों में अभी और विचार की आवश्यकता होगी।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विकास केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सभ्य, संतुलित और जिम्मेदार सामाजिक वातावरण का निर्माण भी उतना ही जरूरी है। लालूर पट्टी में यह पहल क्षेत्रीय समाज सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।