मसूरी, देबीकोल पहाड़ी पर मां भद्रकाली मंदिर प्रांगण में शनिवार को बिसू मेला बड़े उत्साह के साथ मनाया गया है। इस मौके पर महिलाओं ने लोक संस्कृति की अनोखी छटा बिखेरी। जहां एक ओर मंदिर समिति ने मां भद्रकाली का विधिवत पूजन-हवन किया, वहीं श्रद्धालुओं ने मां से आशीर्वाद लेकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

देबीकोल मेले में मौसम ने भी पूरी तरह साथ दिया और विहंगम नजारों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर के पुजारी ब्रह्मानंद बिजल्वाण के नेतृत्व में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद ढोल दमाऊ और रणसिंघे की गूंज पर कई पश्वाओं पर भद्रराज देवता व मां भद्रकाली अवतरित हुईं।

मेले में आई महिलाओं ने रासो, तांदी, धुमसू और जंगूबाजी की अद्भुत छटा बिखेरी जिसका पुरुषों ने भी पूरा साथ दिया।
मंदिर में सुबह से ही ग्रामीण पहुंचने शुरू हो गए थे रंग-बिरंगे पारंपारिक परिधान में मेला प्रांगण मैं पहुंची ग्रामीण महिलाओं ने तांदी नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया। उनका पुरुषो ने भी भरपूर सहयोग दिया। रणसिंघा व ढोल दमाऊ की थाप पर अनेक पशवाओ पर देव अवतरित हुए.

मेला संपन्न होने पर अपने गांव को लौटती महिलाओं व पुरुषों के बीच जगू बाजी का जबरदस्त मुकाबला होता रहा। जगू बाजी में तत्काल छद बनाकर और गाकर एक दूसरे को जवाब देना होता है। 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां भद्रकाली देवी भगवती मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष दो गते बैसाख को बिसू मेला तथा दो गते सावन को आषाढ़ जात्रा जुड़ती है। जिसमे सिलवाड पट्टी के लगभग दो दर्जन गांव के ग्रामीण मां भद्रकाली देवी भगवती की पूजा करने आते हैं। मंदिर के पुजारी ब्रह्मानंद बिजल्वाण ने पूजा संपन्न करवाई।

मेले में देवी कोल पर्यटन एव मेला समिति के महामंत्री नागेंद्र सिंह राणा, कोषाध्यक्ष नागेंद्र सिंह को कोकलियाल सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।