मुआवजे तक में मुश्किल
यह भारत में मानवीय गरिमा के प्रति बेरुखी का प्रमाण है कि देश में आज भी हजारों लोग सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई करने के लिए उनमें उतरने के लिए मजबूर हैं, जबकि 2013 में ही इस चलन पर … Continue reading
खेल संभावनाओं को धक्का
मोहन कुमारपहलवानों में फैली बेबसी की भावना अब सामने आई है। लेकिन यह भावना सिर्फ उन तक ही सीमित नहीं होगी। अनुमान लगाया जा सकता है कि कुछ इलीट स्पोर्ट्स को छोडक़र बाकी पूरे दायरे में लड़कियों में असुरक्षा और … Continue reading
विदेश जाने की आतुरता
आखिर विदेश- खासकर अमेरिका या कनाडा जाने की ऐसी आतुरता क्यों है? क्या यह इस बात का संकेत नहीं है कि भारतवासियों में देश में ही रोजगार पाने या देश में रहते हुए अपना जीवन स्तर बेहतर कर सकने की … Continue reading
भारत तक पहुंची आंच
हूती का कहना है कि जब तक गाजा में इजराइली कार्रवाई नहीं रुकती, उसके हमले जारी रहेंगे। इससे समुद्री परिवहन पर निर्भर विश्व अर्थव्यवस्था के लिए नया संकट पैदा हो गया है। इस संकट की आंच अब भारत तक पहुंच … Continue reading
खड़गे की नई टीम का पैटर्न
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी टीम बनाने में 14 महीने का समय लिया और बहुत सारे महासचिवों और प्रभारियों को उनके पद पर बनाए रखा। लेकिन इसके बावजूद उनकी टीम में एक पैटर्न दिख रहा है और संतुलन बनाने … Continue reading
संसद परिसर में उड़ती खिल्ली के भोंडे आयाम
पंकज शर्मासंसद की सीढिय़ों पर जगदीप धनखड़ की देहभाषा, सदन में कार्यवाही को संचालित करने की शैली और सोच-प्रक्रिया का स्वांग-मंचन देखने के बाद से मेरा दिमाग़ चकरघिन्नी बन गया है। इसलिए नहीं कि तृण-तृण के मूल-मूल में रमे राजनीतिक … Continue reading
खेलों से क्यों खफा मीडिया ?
राजेन्द्र सजवानदिन-रात नेताओं, सांसदों और दलगत राजनीति का भोंपू बजाने वाले टीवी चैनल, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया को क्रिकेट के अलावा कोई दूसरा खेल और खिलाड़ी क्यों नजर नहीं आते?अपने खिलाडिय़ों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। … Continue reading
ट्रंप क्या चुनाव भी लड़ पाएंगे?
श्रुति व्यासक्या कॉलोराडो के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप की व्हाईट हाऊस की राह कठिन हो गई है? एक घटनाक्रम में, जो चौंकाने वाला है भी और नहीं भी, कॉलोराडो ने अपने सर्वोच्च न्यायालय के ज़रिये डोनाल्ड ट्रंप के राज्य में … Continue reading
बेरोजगारी का गंभीर मसला
संसद की सुरक्षा चूक के मामले में बहस का दायरा बढ़ गया है। कानून तोडऩे वालों को अपने किए की सजा मिलनी चाहिए, लेकिन साथ ही उस मसले का हल भी जरूर ढूंढा जाना चाहिए, जो आगे चल कर देश … Continue reading

