यदि मनुष्य है तो ईमानदारी से सोचे
हरिशंकर व्यासईमानदारी से सोचे, यदि मनुष्य है तो जरूर सोचे। हम क्या होते हुए है? क्या ईमानदारी, सदाचारी, सत्यवादी, विन्रम, संतोषी, विश्वासी और प्रेम व करूणा, अंहिसा के सनातनी व्यापक धर्म की नैतिक मंजिले पाते हुए है या भ्रष्ट-बेईमान, झूठे, … Continue reading
विमानों और पायलटों पर जाँच कड़ी ही नहीं औचक भी होनी चाहिए
रजनीश कपूरमामला देश की एक नई निजी एयरलाइन का है। इसके पास मात्र 25 हवाई जहाज़ हैं। हाल ही में उनमें से 14 हवाई जहाज़ों में रडर कंट्रोल सिस्टम’ (पतवार नियंत्रण सिस्टम) को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन डीजीसीए … Continue reading
खाद्यान्नों की महंगाई नहीं रूक रही
अजीत द्विवेदीएक बार फिर सरकार की ओर से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी हुए हैं और एक बार फिर कहा गया है कि खाने पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह … Continue reading
पार्टियां मुफ्त की रेवड़ी के नाम पर वोट लेती रहेंगी
अजीत द्विवेदीदेश में चुनाव का सीजन चल रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद दो राज्यों के चुनाव हुए हैं और दो अन्य राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। अगर पूछा जाए कि इस साल के हर चुनाव … Continue reading
कांग्रेस कमाल की पार्टी, रोने बिसूरने में लगी
अजीत द्विवेदीकांग्रेस कमाल की पार्टी हो गई है। चुनाव हारते ही वह इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और चुनाव आयोग को कोसना शुरू कर देती है। हालांकि ऐसा नहीं है कि ईवीएम को लेकर सवाल नहीं हैं या चुनाव आयोग … Continue reading
शास्त्रीय भाषाओं का विस्तार
अशोक शर्माभारत सरकार ने पांच नयी भाषाओं को ‘शास्त्रीय’ (क्लासिकल) भाषाओं की श्रेणी में शामिल किया है। ये भाषाएं हैं- मराठी, पाली, प्राकृत, असमी एवं बांग्ला। संस्कृत, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और उड़िया पहले से ही इस सूची में हैं। … Continue reading
भविष्य की राह : ईवी चार्जिंग के लिए दिशा- निर्देश, 2024
समीर पंडिताभारत का लक्ष्य 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करना है, इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) परिवहन क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, ईवी को व्यापक रूप से अपनाना एक विश्वसनीय और सुलभ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर … Continue reading
एक भारत श्रेष्ठ भारत- भारतीय फिल्मों की एकसूत्र में बांधने की शक्ति
अश्विनी वैष्णवप्रख्यात फिल्म निर्माता सत्यजीत रे ने लोगों को एकसूत्र में बांधने की सिनेमा की शक्ति के सार को पकड़ते हुए कहा था, सिनेमा एक सार्वभौमिक भाषा बोलता है। अपनी व्यापक भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता के साथ, भारतीय सिनेमा देश … Continue reading
हर नाकामी आपको कामयाबी की अहमियत बताती है
सुशील कुमार सिंहवाशु भगनानी और जैकी भगनानी पर अनेक लोग उन भुगतान नहीं करने के आरोप लगा रहे हैं। ‘बड़े मियां छोटे मियां’ को इस साल की सबसे बड़ी फ्लॉप माना गया है। यह इन्हीं पिता-पुत्र की फि़ल्म थी जो … Continue reading

