नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने पर पहली बार बात की. उन्होंने कहा कि क्लीन नोट नीति के तहत 2000 रुपये निकालने का फैसला किया गया है. आइए जानते हैं क्या है ये क्लीन नोट पॉलिसी

क्लीन नोट नीति क्या है?
क्लीन नोट नीति के तहत, आरबीआई यह सुनिश्चित करता है कि अच्छी गुणवत्ता वाले बैंक नोट जनता तक पहुंचे। साथ ही इस नीति के माध्यम से देश की मौद्रिक व्यवस्था को शुद्ध रखने का प्रयास किया जाता है। क्लीन नोट नीति के तहत क्षतिग्रस्त, नकली और गंदे नोटों को हटाकर उनकी जगह बाजार में साफ और अच्छे नोटों की आपूर्ति कर भारतीय मुद्रा की अखंडता को बनाए रखा जाता है।

क्लीन नोट नीति के लाभ
नोटों को चलन में रखने के लिए आरबीआई की यह नीति काफी अहम मानी जा रही है। नई क्लीन नोट नीति वर्ष 2018 में लागू की गई थी। इस नीति के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को गंदे, खराब और क्षतिग्रस्त नोटों को अच्छे नोटों से बदलना अनिवार्य है। आपको बता दें कि भारत में नोटबंदी का चलन कोई नया नहीं है। आरबीआई समय-समय पर नोटबंदी की घोषणा करता है। देश में पहली बार 1946 में नोटबंदी की गई थी।

2018 में 2000 रुपए के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी
RBI ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा की। हालांकि नोटों को बैंक में बदलने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है. आपको बता दें कि 8 नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था.

जिसके तहत 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए गए।और इसकी जगह 2000 रुपए के नए नोट चलन में लाए गए। लेकिन अब इन नोटों पर भी प्रतिबंध लगाया जा रहा है. गौरतलब है कि सेंट्रल बैंक ने 2018 में ही 2000 रुपए के नोटों की छपाई बंद कर दी थी।

बाजार में कितने हैं 2000 रुपये के नोट?
एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 31 लाख 33 हजार करोड़ रुपए के नोट चलन में हैं। उस 2000 रुपये के नोट में कुल 3 लाख 13 हजार करोड़ रुपये हैं। बता दें कि मार्च 2018 में 2000 रुपये के 6.73 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे, लेकिन मार्च 2023 में 2000 रुपये के नोटों की संख्या घटकर 3.62 लाख करोड़ रुपये रह गई.

2000 रुपए के नोट पर शक्तिकांत बोले:
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि आम लोगों के पास 2000 रुपए के नोट बदलने के लिए 4 महीने का समय है। लोग नोट बदलने से घबराएं नहीं। नोट्स आसानी से बदलें। इसको लेकर बैंकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अगर फिर भी लोगों को किसी तरह की दिक्कत होती है तो वे बैंक या आरबीआई से संपर्क कर सकते हैं।

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