नैनबाग : भद्रराज देवता के मेले में बुधवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा है । मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। टिहरी जनपद के विकास जौनपुर के अंतर्गत क्षेत्र अधिकांश जगहों पर बेसासी के शुभारंभ से ही थौल मेला मनाने की पौराणिक प्रथा आज भी देखने को मिलती है

पौराणिक भद्रराज मंदिर त्याड़े की जहां पर दर्शन हेतु सुबह से ही भक्तों का ताता लगा रहा. खराब मौसम होने के बावजूद भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान जय द्वार से भद्रराज देवता की पालकी को स्नान हेतु यमुना नदी ले जाया गया उसके बाद पालकी ढोल दमाऊ के साथ भव्य तरीके से नैनबाग, कोठी पाव , जय द्वार से होते हुए त्याडे मंदिर पहुंची, वहीं रात्रि में भव्य जागरण का आयोजन किया गया. जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने जमकर आनंद लिया। इसके साथ साथ स्थानीय वाघ यंत्र ढोल दमाऊ के साथ महिला और पुरुषों में जमकर नृत्य का आनंद भी लिया।

आपको बता दे भद्रराज मंदिर त्याडे में दर्जनों गांव के लोगों की हजारों वर्षों से आस्था जुड़ी हुई है। जहा पर प्रतिवर्ष 19 अप्रैल 6 गति बेसाख को भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर घर परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

भद्रराज मेला संस्कृति एवं पर्यटक विकास समिति त्याडा के अध्यक्ष जोत सिंह रावत ने कहा कि यह मेला पौराणिक मेला है जो कि हजारों वर्षों से चला आ रहा है यहां पर पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं यदि सरकार द्वारा यहां पर सडक की सौगात दी जाए तो आने वाले समय में पर्यटक के क्षेत्र में काफी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं को पलायन न कर अपने घर पर ही बेहतर रोजगार मिल सकता है. इस दौरान मंदिर समिति के सचिव दिनेश सिंह तोमर, उपाध्यक्ष तब स्वराज पवार , कोषाध्यक्ष अर्जुन पवार, जबर सिंह पवार , अनूप पवार , प्रधान वीरेंद्र तोमर , हरिदास सुमन , संजय आदि के साथ-साथ हजारों की संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि एव क्षेत्र की जनता उपस्थित थी।

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