आज की बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनता जा रहा है। अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यही समस्या आगे चलकर गाउट जैसे दर्दनाक गठिया रोग का रूप ले सकती है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खून में यूरिक एसिड का स्तर अधिक रहने की स्थिति को हाइपरयूरिसेमिया कहा जाता है, जो जोड़ों में सूजन और असहनीय दर्द का कारण बनती है।

यूरिक एसिड दरअसल शरीर में मौजूद प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है। सामान्य स्थिति में किडनी इसे फिल्टर कर पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है, लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती या यूरिक एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है। इसका असर खासतौर पर पैरों के अंगूठे, घुटनों और टखनों में अधिक देखा जाता है, जहां सूजन, लालिमा और जकड़न की शिकायत बढ़ जाती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गलत डाइट, मोटापा, पानी की कमी और निष्क्रिय जीवनशैली यूरिक एसिड बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या सिर्फ जोड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किडनी स्टोन और हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि खान-पान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं।

किन खाद्य पदार्थों से बनाएं दूरी?

यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए सबसे पहले डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।

रेड मीट और कुछ मछलियों में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन सीमित करें।

राजमा, उड़द, अरहर और काबुली चना जैसी दालों का अत्यधिक सेवन भी यूरिक एसिड बढ़ा सकता है, इन्हें संतुलन में लें।

कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा जैसे शुगर-युक्त पेय यूरिक एसिड लेवल तेजी से बढ़ाते हैं, इनसे परहेज करें।

प्यूरीन युक्त भोजन कम करने से भविष्य में जोड़ों की सूजन और दर्द के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पानी और विटामिन-C की अहम भूमिका

शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड बाहर निकालने में पानी सबसे अहम हथियार माना जाता है।

दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।

पर्याप्त पानी से किडनी को टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही संतरा, नींबू और आंवला जैसे विटामिन-C से भरपूर फल डाइट में शामिल करें। विटामिन-C किडनी के कार्य को बेहतर बनाकर यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होता है।

फाइबर और चेरी क्यों हैं फायदेमंद?

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में अतिरिक्त यूरिक एसिड को अवशोषित करने में मदद करते हैं।

दलिया, साबुत अनाज और हरी सब्जियां रोजाना आहार में शामिल करें।

चेरी को यूरिक एसिड और गाउट के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

चेरी में मौजूद एंथोसायनिन नामक तत्व जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।

जीवनशैली में जरूरी बदलाव

नियमित व्यायाम: रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक से मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है।

वजन नियंत्रण: बढ़ा हुआ वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए वजन संतुलित रखना जरूरी है।

समय पर जांच: जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या लालिमा होने पर सीरम यूरिक एसिड टेस्ट जरूर कराएं।

शुरुआती सावधानी: छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर इस समस्या को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी तरह की दवा या उपचार शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

(साभार)