मसूरी। पहाड़ों की रानी के नाम से विश्वविख्यात मसूरी को जहां माल रोड सुधार कार्य से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं अब शहर के चारों ओर की सड़कों पर बह रहा सीवर पर्यटकों को ही नहीं बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी परेशान कर रहा है. लेकिन आम नागरिक इस समस्या के समाधान के लिए किससे शिकायत करें। जल संस्थान में वर्षों से काम कर रहे ये भ्रष्ट अधिकारी फोन उठाना भी उचित नहीं समझते।

जी हां, पर्यटन नगरी मसूरी में पर्यटन सीजन की शुरुआत हो गई है। देश-विदेश से पर्यटक या यहां तक ​​कि हमारे मेहमान भी यहां की खूबसूरत वादियों का लुत्फ उठाने आते हैं। लेकिन शहर के चप्पे-चप्पे पर बह रहा गंदा पानी सैलानियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों को भी परेशान कर रहा है. लेकिन अधिकारी और जिस विभाग की जिम्मेदारी इस समस्या के समाधान की है, वह अपने-अपने कमीशन में लगे हैं। मानो इन भ्रष्ट अधिकारियों को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार ही नहीं है।

ज्ञात हो कि मसूरी के मॉल रोड पर इलाहाबाद बैंक के नीचे और लक्समाउंट व लक्समाउंट होटल व शिशु मंदिर के बीच दो दिनों से सीवर बह रहा है. पिक्चर पैलेस चौक में पिछले कई दिनों से रोजाना सीवर बहता नजर आ जाता है, जिसका स्थाई समाधान ये भ्रष्ट अधिकारी आज तक नहीं कर पाए हैं. वहीं तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी के पास बहने वाले सीवर की बात करें तो पिछले एक सप्ताह से स्थानीय नागरिक व व्यापारी इस सीवर की समस्या से परेशान हैं.

इसकी शिकायत वह कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से भी कर चुके हैं। स्वयं दो दिन से मेरे द्वारा जल संस्थान के अवर अभियंता टी एस रावत को फोन किया जा रहा लेकिन ये साहब भी फोन उठाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि लंबे समय तक मसूरी जल संस्थान पर कब्जा करने के बाद अब वह ऊब चुके हैं। अगर आप यहां काम करके थक चुके हैं तो ट्रांसफर करवा लीजिए।

आपके कारण लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। लोगों को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो उनका फोन उठा सकें और उनकी समस्याओं का समाधान कर सकें। ऐसा भी क्या घमंड कि आप फोन उठाने को भी तैयार नहीं हैं।

आपको बता दें कि सुबह सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों का आवागमन होता है। ल्क्समाउंट के नीचे आज सुबह जब हैम्पटन कोर्ट के बच्चे स्कूल के लिए जा रहे थे, तब एक वाहन वहां से गुजरा, तो उस बहते सीवर की गंदगी के छींटे बच्चों पर जा गिरे। जल संस्थान के जेई त्रेपन रावत को फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। दरअसल मैं सुबह टहलता हूं, जब भी ऐसी समस्या होती है तो मैं जेई रावत को फोन करता हूं।

इसलिए अब उन्हें सबसे पहले यह समझ आता है कि कहीं न कहीं कोई प्रॉब्लम होगी, जिसके चलते वे फोन उठाने की सोच भी नहीं सकते। एक आम नागरिक परेशान होगा जब ये भ्रष्ट अधिकारी हमारा फोन उठाना उचित नहीं समझेंगे। ऐसे में आम जनता अपनी समस्या किससे ले। जबकि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि अधिकारी अपना फोन हमेशा ऑन रखें और सभी कॉल रिसीव करें. अगर किसी वजह से फोन रिसीव नहीं होता है तो कॉल बैक कर जन समस्याओं का निवारण करें।

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