उपेंद्र सिंह रावत :
देहरादून के राजेश्वर नगर फेज एक में हर साल की तरह इस साल भी रावण दहन का कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किया गया। विजयदशमी के इस पावन दिन पर पूरी कॉलोनी एक उत्सव के माहौल में डूबी हुई थी। शाम होते-होते पूरा मैदान रंग-बिरंगी रोशनियों से सजा हुआ था, और ढोल-नगाड़ों की धुन पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी में अद्भुत ऊर्जा दिख रही थी।
राजेश्वर नगर के निवासी जगदीश कुमार कथूरिया ने बताया कि वह पिछले कई दशकों से रावण का पुतला खुद अपने हाथों से बनाते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने बड़े जतन से रावण का विशाल पुतला तैयार किया। पुतले की ऊंचाई इस साल और भी ज्यादा थी, जो दूर-दूर से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। “यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी आस्था का प्रतीक है,” जगदीश ने पहाड़ न्यूज़ की टीम को बताया। “रावण दहन हमारे समाज में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और मैं इस मौके को खास बनाने के लिए हर साल अपने तरीके से रावण का पुतला तैयार करता हूँ।”
रावण दहन से पहले विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम की शुरुआत राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी से हुई, जिसने वहां मौजूद लोगों को रामायण के पवित्र प्रसंगों की याद दिला दी। शाम के हल्के अंधेरे के बीच जब रावण के पुतले को आग लगाई गई, तो पूरा आकाश रंगीन आतिशबाज़ी से रोशन हो उठा। जलता हुआ रावण मानो बुराई के अंत और सत्य की विजय का संदेश दे रहा था।
इस दौरान आसपास के इलाकों से भी लोग इस अनूठे कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए आए। कॉलोनी में रहने वाले बच्चे, युवा और बुजुर्ग, सभी ने कार्यक्रम का आनंद लिया। रावण दहन के बाद प्रसाद वितरण किया गया, और सबने एक दूसरे को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं।
यह आयोजन एक परंपरा से कहीं अधिक था—यह लोगों को एक सूत्र में बांधने वाला, अच्छाई की ओर प्रेरित करने वाला और नए उत्साह के साथ जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रतीक था।


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