टिहरी : अगलाड़ नदी में होने वाले ऐतिहासिक राजमौण को लेकर रविवार को जौनपुर के अंतर्गत लालूर पट्टी के जगधार में पांतीदारों की अहम बैठक हुई. जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष लालूर पट्टी के नौ गांव के लोग मौण निकालेंगे। 29 जून को मौण मेला मनाने का निर्णय लिया गया। है। ऐतिहासिक राजमौण में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
टिहरी जनपद के विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत लालूर पट्टी के जगधार में स्थानीय जनप्रतिनिधि एव गणमान्य लोगों की आम बैठक खजान सिंह चौहान की अध्यक्षता में पूरी हुई. जिसमे इस बैठक में अगलाड़ नदी में मनाए जाने वाला पौराणिक राज मौण मेले को लेकर भी चर्चा की गई। और सर्व सहमति से 29 जून को अगलाड़ नदी में मनाए जाने वाला पौराणिक राज मौण मेले को मनाने की तिथि भी घोषित की गई।

आपको बता दें कि जौनपुर विकासखंड के अंतर्गत अगलाड़ नदी में आयोजित पौराणिक राज मौण मेले में टिमरू पाउडर निकालने की पाती इस बार लालूर पट्टी के नौ गांव की है जिसमें यह सभी गांव वाले अब मौण मेले हेतु टिमरू के पाउडर को तैयार करेंगे।
इसके साथ-साथ इस बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि जितने भी बाहरी लोग फेरी हेतु गांव गांव में आते हैं। उन सभी को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। साथ ही बाहरी लोगों का जमकर विरोध किया जाएगा। इसके साथ यह भी तय किया गया जो भी मकान मालिक किराए पर मकान देगा और यदि भविष्य में कोई घटना होगी तो इतने मकान मालिक की स्वयं की जिम्मेदारी रहेगी।
बैठक के दौरान लालूर पंपिंग योजना के संबंध में भी चर्चा की गई। जिसमें सभी गणमान्य लोगों ने आपत्ति व्यक्त की और कहा कि हमें पीने का पानी सही ढंग से नहीं मिल पा रहा है। और जो ठेकेदार द्वारा कार्य भी किया जा रहा है वह भी सही नहीं हो पा रहा है। जिसमें इस संबंध में 12 जून 2023 को दोबारा समस्याओं के निराकरण हेतु बैठक रखी गई है.
इसलिए मनाया जाता है मौण
अगलाड़ नदी के पानी से भी खेतों की सिंचाई होती है। मछलियों को मारने के लिए नदी में डाला जाने वाला टिमरू का चूरा पानी के साथ खेतों में पहुंच जाता है और फसलों को चूहों और अन्य कीटों से बचाता है।
राजशाही से आ रही है परंपरा
इस मेले की शुरुआत टिहरी रियासत के राजा नरेंद्र शाह ने खुद अगलाड़ नदी में पहुंचकर शुरू किया था । इसे आपसी मतभेदों के कारण वर्ष 1844 में बंद कर दिया गया था। वर्ष 1949 में इसे फिर से शुरू किया गया था। राजशाही के शासनकाल के दौरान, अगलाड़ नदी के मौण के त्योहार को राजमौण उत्सव के रूप में मनाया जाता था। उस समय मेले की तिथि और स्थान रियासत के राजाओं द्वारा तय किया जाता था।
इस बार 29 जून को है मौण मैला
इस बार ऐतिहासिक पर्व मौन मेला 29 जून को मनाया जाएगा। इस बार मेले में छह से दस हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है.
इस बैठक में भाजपा मंडल उपाध्यक्ष मुन्ना सिंह पवार , खजान सिंह चौहान, चमन सिंह कैंन्तुरा , बचन सिंह मलयाल , भगत सिंह रावत , अनिल भंडारी के साथ अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।


Recent Comments