टिहरी गढ़वाल। लखवाड़ बाँध प्रभावित काश्तकारों द्वारा लगातार 37वें दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रखा गया जिसमें सभी प्रभावित काश्तकारों, मातृशक्ति व बेरोजगार युवाओं द्वारा बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया गया तथा उनके द्वारा शासन प्रशासन से सभी 23सूत्रीय मांगों को पूर्ण करने का आह्वान किया गया।

ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है जिलाधिकारी टिहरी द्वारा 15/11/2025 को आहूत की गयी बैठक में काश्तकारों की 23सूत्रीय मांगों में से एक मांग को बिना पूर्ण किए ही बैठक की इतिश्री कर दी गयी, उस बैठक के कार्यावृत को संज्ञान में लिया जाये तो उस कार्यावृत में जिलाधिकारी टिहरी द्वारा एक भी मांग को पूर्ण नहीं किया गया और बिना एक भी मांग को पूर्ण किए आंदोलन को उठाने की बात कही गयी जो कि अपने आप में एक प्रश्नचिन्ह है।

एक जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी को जो कि पुरे जिले का सर्वेसर्वा होता है इस प्रकार स्वभाव शोभा नहीं देता, 15/11/25 की बैठक के कार्यावृत के आधार पर ही जिलाधिकारी महोदया द्वारा उपजिलाधिकारी महोदया को धरना स्थल पर खानापूर्ति के लिए भेज दिया गया जबकि उस कार्यावृत में 23सूत्रीय मांगों में से एक भी मांग को पूर्ण नहीं किया गया, आखिर इन अधिकारीयों द्वारा किस आधार पर धरने को ख़त्म करने की बात की जा रही है, एक सक्षम अधिकारी द्वारा बिना कोई किसी मांग को पूर्ण किए बिना धरने को ख़त्म करवाने की बात करना किसी भी प्रकार से न्यायपूर्ण नहीं है।

जिलाधिकारी टिहरी के अधिकार क्षेत्र में होते हुए भी किसी भी मांग को पूर्ण नहीं किया गया जो की काश्तकारों, महिलाओं व बेरोजगार युवाओं के लिए सरासर अन्याय है।

सभी बाँध प्रभावित काश्तकारों, महिलाओं व बेरोजगार युवाओं का कहना है कि जब तक सभी 23सूत्रीय मांगों को पूर्ण नहीं जाता तब तक ये आंदोलन ऐसे ही अनवरत जारी रहेगा और इस आंदोलन को आगे और भी उग्र किया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

आज धरनास्थल पर संदीप तोमर लोहारी, महेंद्र पुंडीर, राकेश राणा, प्रदीप रावत, सुरेश रावत, अधिवक्ता दीपक रावत, गजेंद्र चौहान, श्रीपाल रावत,दिनेश, शंकर पाल, बलबीर वर्मा, प्रदीप भंडारी, शेर सिंह, शूरवीर चौहान, मुन्ना, सोनू तोमर, बाबूराम शर्मा,सब्बल सिंह,महिपाल सिंह रावत, विवेक तोमर आदि उपस्थित रहे।