मसूरी-
कैम्पटी के रियाट गांव में हुई घटना ने पूरे गांव को भय और चिंता के माहौल में डाल दिया है। सुरजन सिंह राठौर, जिनकी जीविका उनके मवेशियों पर निर्भर थी, अपने जीवन के आखिरी दिन की शुरुआत एक साधारण सुबह के रूप में कर रहे थे। वह अपने गाय और बकरियों के साथ जंगल की ओर गए थे। अचानक, जंगल की शांत फिज़ा में ततैयों के झुंड ने आक्रमण कर दिया। यह हमला इतना तीव्र और अप्रत्याशित था कि सुरजन सिंह और उनके जानवरों की चीखें दूर-दूर तक गूंजने लगीं।

घास काटने गई एक महिला ने यह सब देखा और दौड़कर गांव में लोगो को घटना के बारे में बताया । गांव वालों ने तेजी से एकजुट होकर सुरजन सिंह को जंगल से निकालकर उप जिला चिकित्सालय मसूरी पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों की ओर से मिली वह खबर, कि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है, ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

कुछ दिन पहले ही केम्पटी छेत्र में एक अन्य परिवार ने अपने प्रियजनों को ततैयों के ऐसे ही हमले में खो दिया था। उस घटना ने गांव में दुःख और असहायता का दर्दनाक एहसास भर दिया था। इन घटनाओं ने गांव वालों को भयभीत और सतर्क कर दिया है।

राजेंद्र सिंह राठौर, मृतक के भाई, ने दर्द भरी आवाज़ में बताया कि उनका भाई बेहोशी की हालत में लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की घोषणा ने उनकी उम्मीदों पर पूर्णविराम लगा दिया। पोस्टमार्टम न हो पाने की वजह से परिवार को पूरी रात इंतजार करना पड़ रहा था, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ गई।

कैम्पटी पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया और मामले की जांच शुरू की। अब गांव के लोग उस जंगल की ओर जाने से डरने लगे हैं, जहां से जीवन और मौत के बीच का फासला एक ततैयों के झुंड जितना हो गया है।