देहरादून, PAHAAD NEWS TEAM
उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही जारी है. कांग्रेस ने दूसरे दिन भी सरकार के खिलाफ तीखा रवैया अपनाया। सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायक कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुखर दिखे. इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. वहीं, सदन की शुरुआत से पहले कांग्रेस विधायकों ने अनुपमा रावत के साथ एकजुट होकर सदन के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
विधानसभा सत्र के पहले दिन जहां हरिद्वार की विधायक अनुपमा रावत कांग्रेस की एक तरफ से सत्ताधारी पार्टी पर हमला करती दिखीं, वहीं दूसरे दिन अनुपमा रावत के साथ विपक्ष के सभी विधायक एकजुट हो गए. सदन की शुरुआत से पहले कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी, हरीश धामी, राजेश भंडारी के साथ अनुपमा रावत ने एकजुट होकर सदन के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. बता दें कि हरिद्वार ग्रामीण से विधायक और हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत अपने विधानसभा क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर लगातार सरकार से सवाल कर रही हैं. विधानसभा सत्र के दूसरे दिन उन्होंने कांग्रेस विधायकों के साथ सरकार को घेरने की कोशिश की.
गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए सदन के पटल पर अगले चार महीने के लिए 21116 करोड़ रुपये का लेखानुदान बजट रखा. विधानसभा सत्र में प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने समेत पांच साल के सरकार के कार्यों पर चर्चा हुई. वहीं विपक्ष सत्र के दौरान महंगाई, बेरोजगारी जैसे विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था.
विपक्ष के नेता का चयन क्यों नहीं किया गया: उत्तराखंड के इतिहास में यह पहली बार है कि विधानसभा सत्र में है और सदन में विपक्ष का कोई प्रतिनिधि नहीं है। दरअसल, कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर हरीश रावत और प्रीतम सिंह के गुट आमने-सामने हैं, जिससे देरी हो रही है. हालांकि, एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि एक मजबूत और कार्यात्मक विपक्ष हो, जो सरकार के अच्छे कार्यों में सरकार का समर्थन करे और अगर सरकार की ओर से कोई कमी हो तो उसको एक क्रियात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए।


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