देहरादून, PAHAAD NEWS TEAM

हरेला उत्सव उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत से बना है। जिसका देवभूमि के लोगों के लिए खासा महत्व है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जाना जाता है। वहीं हरेला पर्व के अवसर पर भाजपा सेल्फी विद ट्री अभियान चला रही है, जिसमें प्रदेश के सभी 252 मंडलों में बूथ स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा.

इस बार हरेला पर्व पर सेल्फी विद ट्री अभियान के तहत भाजपा प्रदेश के सभी 252 मंडलों के प्रत्येक बूथ स्तर पर पौधारोपण करेगी. पार्टी ने पौधारोपण के साथ ही कार्यकर्ताओं को लगाए गए पौधों की रक्षा करने का भी निर्देश दिया है.

भाजपा प्रवक्ता नवीन ठाकुर ने कहा कि हरेला उत्सव भारतीय जनता पार्टी के छह अनिवार्य कार्यक्रमों में से एक है। जिसके तहत इस बार हरेला पर्व को अलग तरीके से मनाने का संकल्प लिया गया है और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लाखों पौधे लगाए जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि केवल पौधरोपण ही नहीं बल्कि रोपित पौधों का संरक्षण और संवर्धन भी किया जाएगा ।

आस्था का प्रतीक है लोक पर्व ‘हरेला’ : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उत्तराखंड को भगवान शिव का निवास स्थान भी माना जाता है। जिसके कारण हरेला उत्सव को भगवान शिव के विवाह की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और उनके परिवार के सभी सदस्यों की मूर्तियां मिट्टी से बनाई जाती हैं।

जिन्हें प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है। हरेला उत्सव के दिन कुमाऊं क्षेत्र में कई स्थानों पर मेला भी लगता है। खास बात यह है कि हरेला पर्व साल में तीन बार अलग-अलग महीनों (चैत्र, श्रावण और आषाढ़) में आता है। लेकिन श्रावण मास के पहले दिन पड़ने वाले हरेला का सबसे अधिक महत्व है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश: मान्यता है कि श्रावण मास में यदि किसी भी वृक्ष की टहनी बिना जड़ के ही अगर जमीन में रोप दी जाय तो वह एक वृक्ष के रूप में ही बढ़ने लगता है। इसीलिए कई जगहों पर विशेष रूप से हरेला पर्व के दिन फलदार वृक्ष लगाने का प्रचलन है, जो पर्यावरण के प्रति हमारे कर्तव्य और प्रकृति के प्रति प्रेम को भी दर्शाता है। साथ ही यह पर्व सामाजिक सद्भाव और सहयोग का पर्व है।