नई टिहरी, PAHAAD NEWS TEAM
दुनिया में अपने तीखेपन के लिए पहले पायदान की भूत झोलकिया मिर्च टिहरी में उगाने का प्रयास सफल रहा है।, वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी की सब्जी अनुसंधान परियोजना के तहत भूत झोलकिया मिर्च उगाई गई। हालांकि, मिर्च के व्यावसायिक उपयोग को लेकर कोई नीति नहीं बनने के कारण इसके बीजों की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। वहीं बागबानी विभाग और वन विभाग भी इस मिर्च को जंगली जानवरों से बचाने और किसानों की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए इस मिर्च को उगाने की कार्य योजना तैयार कर रहे हैं.
दुनिया भर में अपने तीखे स्वाद और आम मिर्च से करीब चार सौ गुना तीखी भूत झोलकिया मिर्च टिहरी के फॉरेस्ट्री कॉलेज रानीचौरी में उगाई गई है. वर्ष 2018 में सब्जी शोध परियोजना के जिला समन्वयक डा. तेजपाल बिष्ट ने प्रयोग के तौर पर आसाम वानिकी विवि से लाए बीजों को यहां पर उगाया और लगभग दौ सौ पौधों की नर्सरी तैयार की, जिससे लगभग डेढ़ सौ किलो तक मिर्च का उत्पादन हुआ । इन दिनों टिहरी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कोको रोसे ने भी अपने आवास पर कुछ पौधे लगाए हैं, जिनके पिछले साल मिर्च लगी थी। इन दो प्रयोगों से यह उम्मीद जगी है कि भूत झोलकिया मिर्च की खेती टिहरी में भी की जा सकती है। इस मिर्च की खेती के लिए उद्यान विभाग भी तैयारी कर रहा है, लेकिन अभी इसका बीज नहीं मिल पाया है। बागवानी विभाग का कहना है कि अगर बीज उपलब्ध हो तो मिर्च की खेती से किसानों को बेहतर दाम मिल सकता है।
प्रयोग के तौर पर मैंने अपने आवास पर मिर्च के कुछ पौधे लगाए, जिनमें फल लगे। कुछ राज्यों में, मिर्च का उपयोग जंगली जानवरों को भगाने के लिए भी किया जाता है। उत्तराखंड में अभी इसकी नीति नहीं बनी है।
कोको रोसे, प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी गढ़वाल अभी हमारे पास भूत झोलकिया मिर्च के बीज की उपलब्धता नहीं है । अगर हमें बीज मिलेंगे तो किसान इसकी खेती के लिए प्रेरित होंगे।
डॉ. डीके तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी ———
मिर्च के क्या फायदे हैं
- औषधीय गुणों से भरपूर है मिर्च
- पेट के रोगों में कारगर
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है
- जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा


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