पिथौरागढ़ , PAHAAD NEWS TEAM
जिले की दारमा घाटी में आसमानी आपदा ने ग्रामीणों की जान को खतरे में डाल दिया है. बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण दारमा घाटी की सड़कें और पैदल रास्ते पूरी तरह से जमीदोंज हो गए हैं. जिससे स्थानीय लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर तहसील मुख्यालय धारचूला आना पड़ता है.
बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी को खतरनाक परिस्थितियों में घूमना पड़ता है। जहां खड़ी पहाड़ियों के बीच से सफर करने को मजबूर हैं तो कुछ को लाठियों के सहारे उफनती नालियों को पार करना पड़ रहा है.
चीन की सीमा से लगी दारमा घाटी में 15 जून से 21 जून तक आसमानी आपदा ने ऐसा कोहराम मचा दिया कि हालात अभी भी पटरी पर नहीं आ रहे हैं. आलम यह है कि तवाघाट से लेकर ढाकर तक सड़क मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। जबकि ढाकर से लेकर सीपू तक के फुटपाथ और पुल जमींदोज हो चुके हैं।
जिसके चलते दारमा घाटी के कई गांवों का संपर्क देश और दुनिया से लंबे समय से कटा हुआ है। इन इलाकों में बीमारों और बुजुर्गों को हेलिकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया जा रहा है. वहीं, अन्य लोग अपनी जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हैं। दारमा घाटी के लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सड़कों की मरम्मत नहीं की गई तो क्षेत्र के लोग हिंसक आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
आपको बता दें कि दो दिन पहले हुई भारी बारिश के कारण कूलागाड़ का पुल गिरने से दारमा घाटी, व्यास और चौदास घाटी समेत सैकड़ों गावों का संपर्क कटा हुआ है. जिससे चलते 25,000 से अधिक आबादी कैद होकर रह गयी है। बीआरओ द्वारा कूलीगाड़ में बैली ब्रिज लगाने का प्रयास किया जा रहा हैं।


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