PAHAAD NEWS TEAM

एक टैंकर में पानी तीसरे दिन आता है । अब एक टैंकर पानी से क्या तो करे अपने आप पीएं या अपने पशुओं को पिलाए। लॉकडाउन के कारण सभी लोग आजकल गांव में निवास कर रहे है । जब गांव वालो से बात की तो उनका कहना था की हम लोगो को कभी कभी 10-12 दिन हो जाते है पर नहाने के लिए पानी नसीब नही हो पाता । जब से उत्तराखंड राज्य बना तब से अब तक सिर्फ इतना ही परिवर्तन हुआ है की खतरों के जगह टैंकर से पानी की सप्लाई होने लगी।

इसके लिए हमारे सभी जनप्रतिनिधि सांसद, विधायक ,जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम प्रधान जिम्मेवार है पूर्व में भी कई बार शासन प्रशासन को यहां की पानी की स्थिति की की के बारे में बताया गया और कई बार तो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी यहां पानी की पंप योजना की घोषणा की जा चुकी है परंतु उसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

आज उत्तराखंड बने हुए भी तकरीबन 20 वर्ष के करीब हो गए हैं और उत्तराखंड का शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री होगा जिसको की कांडी पंपिंग योजना के बारे में ना लिखा हो।

हमारी यह कांडी पम्पिंग योजना की चर्चाएं तब ही होती है जब यहां पर चुनाव होने होते हैं क्योंकि सभी पार्टी के नेताओं को पता है की इनके यहां सबसे बड़ी समस्या पानी की है और हर बार चुनाव के कोरे वादे करके जनता को धोखा दिया जाता है परंतु इस बार सभी ग्रामीणों ने यह निश्चित किया है की यदि हमारे यहां पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाली विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार क्या जाएगा।

अगर पानी नहीं तो चुनाव नहीं अगर इसके उपरांत भी किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी यदि गांव में वोट मांगने आता है तो उसको उल्टे पांव वापस लौटा दिया जाएगा। विगत मैं भी नेताओं द्वारा किए गए कोरे वादे और झूठे वादे अब नहीं चलेंगे। अगर पानी की योजना के लिए अगर धरना प्रदर्शन भी करना पड़े तो अब हम लोग उसमें भी पीछे नहीं रहेंगे। क्या करना ऐसे प्रतिनिधि चुनकर जोकि क्षेत्र का विकास ना कर सके l उपेंद्र सिंह रावत