हजारों लोगों की आस्था की प्रतीक मां भद्रकाली देवी देवीकोल में 17 जुलाई को भव्य मेला लगेगा और इसके साथ ही मां भद्रकाली के परिसर में वृक्षारोपण भी किया जायेगा. हर वर्ष आषाढ़ माह के दिन मां भद्रकाली की उपस्थिति में मेले का आयोजन किया जाता है और यह मेला प्राचीन काल से ही चलता आ रहा है।

ऐसा माना जाता है कि मां भद्रकाली को सिलवाड और अठजुला पालक के नाम से भी जाना जाता है। जब भी क्षेत्र के लोगों पर कोई विपत्ति आती है, तो लोग उनके दरबार में उपस्थित होते हैं, माता रानी के आशीर्वाद से क्षेत्र समृद्ध रहता है। इस मौके पर इलाके के सभी लोग अपने पारंपरिक परिधानों में नजर आते हैं और जौनपुरी रासो नृत्य करते हैं. ऐसा माना जाता है कि पहले के समय में जब संचार का कोई साधन नहीं था तो सभी लोग इसी मेले में मिलते थे।

मंदिर समिति ने सभी लोगों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया है

17 जुलाई के दिन सभी गांवों के गाजे-बाजे के साथ देवीकोल स्थित मां भद्रकाली देवी भगवती प्रांगण में पहुंचने का प्रयास करें। कोशिश करें कि मेले में लड़कियाँ और महिलाएँ अपनी पारंपरिक पोशाक में ही शामिल हों।

आप सभी इस मेले में सादर आमंत्रित हैं मां भद्रकाली का आशीर्वाद एवं दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त करें। मेले के शुभ अवसर पर प्रकृति लोक पर्व हरेला कार्यक्रम भी होगा। इसी दिन समिति की एक बैठक भी होगी जिसमें समिति द्वारा आय-व्यय का विवरण , देवी कोल के विकास पर चर्चा , समिति के पूर्व गठन आदि पर चर्चा और सुझाव। देवी कोल मेले और विकास हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। मां भद्रकाली से प्रार्थना करते हैं कि हमारे क्षेत्र में सुख समृद्धि एव खुशहाली बनी रहे।

इस अवसर पर देविकोल मंदिर समिति के सोसायटी अध्यक्ष जोत सिंह रावत , महासचिव नागेन्द्र राणा , कोषाअध्यक्ष नागेन्द्र सिंह रावत , आदि के साथ अनेक पूर्व एव जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे ।

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