नैनीताल , PAHAAD NEWS TEAM
प्री-मानसून आते ही वन विभाग ने पौधरोपण की तैयारी तेज कर दी है. कोविड काल में पूरे देश में ऑक्सीजन को लेकर हो रहे हाहाकार को देखते हुए इस बार बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा. जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू हो रहे पौधरोपण अभियान की कार्ययोजना को वन विभाग ने लगभग अंतिम रूप दे दिया है. वन विभाग के दक्षिणी कुमाऊं के अंतर्गत भूमि संरक्षण प्रभाग नैनीताल, रानीखेत व अतिरिक्त वन प्रभाग रामनगर के अंतर्गत 13 लाख से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है. इस मामले में वन पंचायत को भी पौधरोपण में सक्रिय भागीदारी दी जाएगी।
वन प्रभाग के दक्षिणी कुमाऊं वृत्त अंतर्गत नैनीताल वन प्रभाग के साथ ही भूमि संरक्षण वन प्रभाग नैनीताल, भूमि संरक्षण प्रभाग रानीखेत व अतिरिक्त भूमि संरक्षण प्रभाग रामनगर आता है। विभागीय कार्ययोजना के अनुसार इस बार लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जायेगा. नैनीताल वन प्रभाग में सौ हेक्टेयर में एक लाख दस हजार से अधिक, भूमि संरक्षण नैनीताल प्रभाग अंतर्गत 603 हेक्टेयर क्षेत्र में चार लाख 77 हजार से अधिक, रानीखेत क्षेत्र में 597 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पांच लाख 43 हजार से अधिक और रामनगर क्षेत्र में 188 हेक्टेयर क्षेत्रफल में. एक लाख 72 हजार आठ सौ से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
यह पौधरोपण जायका, कैम्पा, ग्रीन इंडिया मिशन, वन पंचायत सुदृढ़ीकरण, बहुउद्देश्यीय वृक्षारोपण आदि योजनाओं के तहत होंगे। प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए कम से कम 50 पौधे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। वन पंचायत के साथ-साथ युवा, महिला मंगल दल, सामाजिक, धार्मिक संगठन, एनजीओ, एनसीसी, एनएसएस सहित समाज में प्रभाव रखने वाले लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा. अभियान में बांज, बुरांश, काफल, रियांज, कॉल, खरसु, उतिश, देवदार जैसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।
वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं कुबेर सिंह बिष्ट ने बताया कि अगले माह से शुरू हो रहे अभियान के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है. अभियान में वन पंचायतों की सक्रिय भूमिका होगी। जल पर्यावरण के साथ संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चौड़ी पत्ती वाले पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।


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