टिहरी। टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक का एक छोटा सा गांव बेल—जहां आज भी सुबह की पहली किरण पहाड़ियों को छूते ही खेतों और जंगलों में हरियाली बिखेर देती है। इसी शांत और सादगी भरे गांव में रहने वाले आनंद सिंह ने एक ऐसा सपना देखा, जो आमतौर पर शहरों की चमकती पिचों पर जन्म लेता है। उनका सपना था—अपने बेटे संजीत सजवाण को एक बड़ा क्रिकेटर बनाना।

संघर्ष की पिच पर डटे रहे आनंद सिंह
एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले आनंद सिंह के लिए यह सफर आसान नहीं था। गांव की तंग गलियों और मिट्टी की पगडंडियों से गुजरते हुए, संजीत का क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया। लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा थी। न सही बैट, न सही गेंद, और न ही कोई पेशेवर कोचिंग—पर फिर भी, एक पिता के हौसले ने बेटे के सपनों की बुनियाद को मजबूत रखा।
आनंद सिंह ने अपने बेटे के हुनर को पहचाना और किसी भी हाल में उसे मुकाम तक पहुँचाने की ठान ली। दिन-रात खेतों में मेहनत कर, उन्होंने संजीत को जरूरी ट्रेनिंग और सुविधाएं दिलाने की कोशिश की। आसपास के इलाकों में छोटे-मोटे टूर्नामेंटों में भेजना, हर मैच के लिए जरूरी क्रिकेट किट का इंतजाम करना, और हर हार के बाद बेटे को हिम्मत देना—यह सब उनके संघर्ष का हिस्सा था।

2022: जब सपना हकीकत बना
सालों की तपस्या आखिर रंग लाई। साल 2022 में संजीत सजवाण का चयन उत्तराखंड की फर्स्ट क्लास टीम के लिए हुआ। यह खबर आते ही पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। एक छोटे से गांव से निकला लड़का अब बड़े क्रिकेटिंग मंच पर अपने हुनर का जलवा दिखाने जा रहा था। यह सिर्फ संजीत की जीत नहीं थी, बल्कि उन तमाम संघर्षशील पिताओं की भी जीत थी जो अपने बच्चों के लिए हर कठिनाई को पार करने के लिए तैयार रहते हैं।
संजीत की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि सपने सिर्फ शहरों में नहीं, बल्कि छोटे गांवों की मिट्टी में भी जन्म लेते हैं—जरूरत होती है तो बस एक मजबूत हौसले और संघर्ष की!
आगे की राह
अब संजीत सजवाण की नजरें और भी बड़े लक्ष्यों पर हैं। उनका सपना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना है, और इसके लिए वे लगातार मेहनत कर रहे हैं। उत्तराखंड क्रिकेट के उभरते सितारे के रूप में उनकी पहचान बन चुकी है, और आने वाले समय में वे और भी ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।
संजीत की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की नहीं, बल्कि एक पिता के अटूट संकल्प, एक बेटे के समर्पण और एक गांव के गर्व की कहानी है।

