मसूरी। मसूरी के समीप स्थित प्रसिद्ध भद्राज मंदिर में भाद्रपद संक्रांति के अवसर पर भगवान बलभद्र (बलराम) का पारंपरिक भद्राज मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। खराब मौसम के बावजूद मसूरी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भद्राज मंदिर पहुंचे और भगवान बलभद्र के दर्शन कर परिवार की खुशहाली तथा पशुधन की सुरक्षा की कामना की।
मसूरी, पहाड़ों की रानी से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध भद्राज मंदिर में सुबह विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर देवता अवतरित हुए, जिनका श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। इसके बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया।
श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र को दूध, दही, मक्खन और घी के साथ रोट का प्रसाद अर्पित किया। मान्यता है कि भगवान भद्राज पशुधन के रक्षक देवता हैं। क्षेत्र में लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है कि पशुपालक अपने पशुओं से प्राप्त पहला दूध, घी और मक्खन भगवान भद्राज को अर्पित करते हैं।
भद्राज मेले में मसूरी के अलावा जौनपुर, जौनसार, विकासनगर, देहरादून, भावावाला, सेलाकुई समेत आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचे। धार्मिक आस्था के साथ यह मेला क्षेत्र की लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। खराब मौसम के बावजूद मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
मंदिर के पुजारी विजय तिवारी ने बताया कि उनका परिवार पिछले सात पीढ़ियों से भगवान बलभद्र की पूजा-अर्चना करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान भद्राज की क्षेत्र में गहरी आस्था है और दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु भगवान को दूध, दही, घी और मक्खन अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
भद्राज मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश नौटियाल ने मेले में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का भद्राज धाम पहुंचना भगवान भद्राज के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है। उन्होंने मेले के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों, श्रद्धालुओं, स्थानीय ग्रामीणों और समिति के सदस्यों का भी धन्यवाद किया।
पुजारी विजय तिवारी ने बताया कि भद्राज मेले का आयोजन दो दिनों तक होता है और अब मंदिर वर्षभर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं से जुड़ा यह मेला हर वर्ष क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

