देहरादून, 13 सितंबर 2026। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग को लेकर रविवार को देहरादून में कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने बड़ा आंदोलन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने पेंशन मार्च और प्रदर्शन के माध्यम से सरकार के सामने अपनी मांग रखी। आंदोलन में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठन ने भी समर्थन दिया।

आंदोलन का नेतृत्व नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) से जुड़े कर्मचारी संगठनों द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले प्रदेशभर में कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच जनसंपर्क अभियान चलाया गया था और 13 सितंबर को देहरादून में प्रस्तावित पेंशन महारैली में अधिक से अधिक भागीदारी का आह्वान किया गया था।

मुख्यमंत्री आवास घेराव का भी कार्यक्रम

रैली के साथ कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री आवास घेराव और धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम भी रखा। आंदोलनकारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आंदोलन में भाग लेने के लिए कर्मचारी देहरादून पहुंचे। अल्मोड़ा के द्वाराहाट क्षेत्र से भी 100 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी तीन बसों के जरिए देहरादून के लिए रवाना हुए थे।

कर्मचारियों की क्या है मांग?

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांग पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करना है। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने नई पेंशन व्यवस्था और वैकल्पिक पेंशन व्यवस्थाओं पर अपनी असहमति जताते हुए सरकार से OPS लागू करने की मांग दोहराई।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इससे पहले भी उत्तराखंड में इस मांग को लेकर उपवास, रैली और विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किए जा चुके हैं।

आंदोलन से सरकार पर बढ़ा दबाव

13 सितंबर की यह रैली पुरानी पेंशन बहाली को लेकर उत्तराखंड में चल रहे लंबे आंदोलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। अब कर्मचारियों की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।

कर्मचारियों का संदेश साफ है—
“पुरानी पेंशन बहाल करो, कर्मचारियों को उनका हक दो।”