बिना सिर-पैर वाली योजनाओं के नाम पर पैसों की बर्बादी देखना चाहते हैं तो तहसील चौक पर बने फुट ओवरब्रिज पर आइए। करीब ढाई करोड़ की लागत से बने शहर के एकमात्र फुट ओवरब्रिज पर लोग नहीं, सिर्फ विज्ञापन। इससे एजेंसी को हर महीने लाखों रुपए की कमाई हो रही है, लेकिन सात साल से लोग पैदल ही सड़क पार कर रहे हैं।

कांग्रेस सरकार के दौरान मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने वर्ष 2015 में हरियाणा की एक कंपनी से इस फुट ओवरब्रिज के निर्माण का जिम्मा लिया था। जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया था। लेकिन, यह ओवरब्रिज उद्घाटन के सात साल से बंद है। ऐसे में लोग वाहनों के आवागमन के बीच जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को विवश हैं।

विज्ञापन एजेंसी गुमराह करती रही

संपर्क रिपोर्टर एक ग्राहक के रूप में यह जानने के लिए पहुंचा कि फुट ओवरब्रिज पर विज्ञापन प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है और इसकी लागत कितनी है। फुट ओवरब्रिज के नीचे पान दुकान के मालिक के पास एजेंसी का नंबर मिला। इस नंबर पर बातचीत के दौरान शख्स ने कहा कि विज्ञापन किस तरह का है, कितने दिन के लिए लगाना है, उसके हिसाब से रेट तय होता है.

15 दिन के लिए विज्ञापन लगाने को कहा तो कम समय में रेट बताने को कहा है। दस मिनट बाद उसके फोन की घंटी बजी। उन्होंने खुद माइलस्टोन मीडिया को अगले दिन मेरे ऑफिस आने को कहा। वहीं बैठ कर बात करेंगे। सुबह ऑफिस का पता बताने को कहा। अगले दिन सुबह 11 बजे फोन किया और कहा कि वह व्यस्त हैं। ई-मेल आईडी देकर कोटेशन भेजा गया। इसके बाद न तो कोई जवाब आया और न ही फोन रिसीव हो रहा था।

एमडीडीए और नगर निगम ने झाड़ा पल्ला

फुट ओवरब्रिज निर्माण के बाद से ही निर्विरोध बना हुआ है। शायद इसलिए यह काम नहीं करता। एमडीडीए के अधीक्षण अभियंता हरिश्चंद्र सिंह राणा का कहना है कि फुट ओवरब्रिज की जिम्मेदारी प्राधिकरण की नहीं है। एक फुट ओवरब्रिज पर एक विज्ञापन दिखाई देता है ऐसे में इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका की हो सकती है। वहीं नगर निगम कर अधीक्षक विनय प्रताप सिंह ने भी इससे इनकार किया है. उनका कहना है कि फुट ओवरब्रिज पर लगे विज्ञापन से निगम का कोई लेना-देना नहीं है। निगम की विज्ञापन साइट नहीं है।

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