नैनबाग : एक तरफ जहां आज लोग खेती-किसानी से चिढ़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ युवा अब सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं. सैन्दूर के रहने वाले बोबी पवार ने भी अपनी मेहनत से खेती को नया आयाम दिया है. 30 वर्षीय बोबी पवार ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने के बाद आजीविका की तलाश में घर छोड़ दिया और नैनबाग बाजार में किराए की दुकान लेकर फल और सब्जी की दुकान खोली। और बी.ए. की पढ़ाई भी की.

वर्ष 2013 में राजकीय महाविद्यालय नैनबाग विद्यार्थी संघ के चुनाव के दौरान कुछ छात्रों ने मिलकर विद्यार्थी संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था और बोबी पवार की जीत हुई थी । इसके साथ हिंदुस्तान अखबार में पत्रकारिता का काम भी किया है। इसके साथ साथ फल व सब्जियां का काम जारी रखा है। जिसमें आसपास के गांव से सेब, आडू, खुमानी सहित कई प्रकार के फल बिकने आते थे। जिन्हें पर्यटक महंगे दामों पर खरीदते थे। यह देख बॉबी पवार को अपने गांव के खेत याद आ गए। जिसमें यह तक फल पैदा हो सकते थे।

सभी ने बोबी पवार की हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने बताया कि मेहनत और आधुनिक तकनीक से बागवानी आय संभव है। एक दिन वह भी पवार में यमुनोत्री मार्ग पर बसे नैनबाग ते मात्र 25 किलोमीटर पर स्थित टिहरी जिले के विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत सैन्दूर गांव लौट आये थे। और नानी जलमा देवी द्वारा दान की गई भूमि पर अपनी बागवानी की योजना परिवार वालों को बताई। सभी ने बोबी का उत्साह बढ़ाया। क्योंकि इससे पहले गांव में लगे सेब के बाग फेल हो चुके थे. मगर बोबी अपने परिवार के साथ बागवानी की मुहिम में जुट गए। इसके लिए क्षेत्र के प्रसिद्ध बागवानो से भी पौधों सलाह ली।

फिर बोबी पवार ने हिमाचल प्रदेश से विभिन्न किस्म के फलदार पौधे खरीदे। उनकी मेहनत देख उसकी मदद के लिए उद्यान विभाग भी आगे आया और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया। आज बोबी के पास विभिन्न किस्मों के 2000 फलदार पेड़ है . और इस वर्ष 1000 और उन्नत सेब के पौधों के रोपण की योजना पर काम चल रहा है। बागवानी के साथ-साथ बोबी पवार ऑफ सीजन वेजिटेबल और औषधीय पौधो की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसके प्रयोग के तौर पर वे औषधीय पौधे तैयार कर रहे हैं। इसके लिए मैं प्रशिक्षण लेने की योजना बना रहे हैं।

बोबी पवार जिस तरह अपने मिशन में आगे बढ़ रहे हैं। वे जल्दी ही अपने साथ-साथ अन्य परिवार को भी रोजगार देने में सक्षम हो जाएंगे। बोबी जैसा युवाओं में जज्बा हो मेहनत हो, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। आधुनिक और विविधता भरी उनकी खेती को देख कृषि वैज्ञानिक भी दांतो तले उंगली दबा लेते हैं।

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