27 में से केवल नौ होटल वर्तमान में चालू
40 और होटलों पर हो सकती है कार्रवाई
देहरादून
पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की फटकार के बाद उत्तराखंड प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड (पीसीबी) की नोंद की नींद टूटी है। जिसके बाद पीसीबी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे 67 होटलों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 27 होटलों को बंद करने के आदेश और 40 अन्य को व्यवस्था में सुधार करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। कुछ होटलों पर भारी- भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।
मसूरी में सैकड़ों की तादाद में छोटे-बड़े होटल व होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई होटल खुलेआम पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस पर पीसीबी की चुप्पी के चलते एनजीटी की ओर से लगातार संज्ञान लिया जा रहा है और पीसीबी को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा रहा है। बीते आठ माह के भीतर मसूरी के होटलों पर कार्रवाई को लिए एनजीटी तीन से चार बार दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। प्राकृतिक जलस्रोतों के अत्याधिक दोहन और खुले में सीवेज का निस्तारण कर कई होटल पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे हैं। एनजीटी के निर्देश पर पीसीबी की ओर से बीच-बीच में नोटिस भेजने की कार्रवाई तो की गई, लेकिन यह महज खानापूर्ति साबित हुई। इस पर पीसीबी को फटकार लगाते हुए एनजीटी ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में पीसीची ने मसूरी के 27 होटलों को नोटिस जारी कर संपत्तियों को बंद करने के निर्देश दिए। साथ ही ऊर्जा निगम को भी उक्त होटलों की बिजली काटने को कहा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव सुशांत पटनायक ने बताया कि पीसीबी की ओर से जिन 27 होटलों को बंद करने का नोटिस भेजा गया है, फिलहाल उनमें से महज नौ संचालित हो रहे है। अन्य होटल नवीनीकरण और संपति विवाद के कारण बंद पड़े हैं। पीसीबी की टीम ने सभी 27 होटलों का निरीक्षण करने के बाद पाया कि उक्त होटल पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।
एनजीटी के निर्देश पर बीते माह
पीसीबी की ओर से मसूरी के कुल 282 होटलों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 215 के पास होटल संचालन का सहमति प्रमाण पत्र मिला। वहीं, 67 होटल मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिनमें से 27 के विरुद्ध कार्रवाई कर दी गई है। सहमति पत्र प्राप्त न करने वाले शेष 40 होटल के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है।

