उत्तराखंड प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि जी.एस.टी. इस अधिनियम के तहत देशभर में चेकिंग पोस्ट खत्म कर दी गईं और मोबाइल दस्तों को उड़नदस्ते में बदल दिया गया, लेकिन देहरादून में हम मोबाइल वैन को पूर्ण चेकपोस्ट के रूप में दौड़ते देख रहे हैं। उनके द्वारा हर वाहन को चेक पोस्ट पर बुलाकर चेक किया जाता है, जिससे देहरादून के व्यापारी और ट्रांसपोर्टर काफी परेशान हैं। हमारी मांग है कि इस चेक पोस्ट को बंद किया जाए।
दून उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विपिन नागलिया ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले व्यापारियों का माल किसी छोटी-मोटी मानवीय भूल या लिपिकीय त्रुटि या ई-वे बिल आदि के कारण जबरन रोका जाता है। , व्यापारी से भारी जुर्माना वसूला जाता है।
हमारा मानना है कि ऐसे मामले में कानूनी बाध्यता होने पर भी अधिकारी अपने विवेक का इस्तेमाल कर न्यूनतम जुर्माना वसूलने के बाद भी माल छोड़ सकता है, लेकिन इन अधिकारियों का लक्ष्य अधिकतम जुर्माना वसूलना और व्यापारी का खून चूसना है। टैक्स से सरकारी खजाना भरना चाहिए। ताकि विभाग में उनकी सराहना हो सके..

दून उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा
देहरादून के व्यापारी इन अधिकारियों के उत्पीड़न से बेहद परेशान हैं, आए दिन कोई न कोई गलती निकालकर व्यापारियों से जीएसटी वसूला जाता है। कानून के मुताबिक अधिकतम जुर्माना लगाया जाता है
और जिस व्यापारी का माल रुक जाता है वह अपनी दुकान और कारोबार छोड़कर कई दिनों तक चेक पोस्ट के चक्कर लगाता रहता है, ट्रक ड्राइवर भी अलग से परेशान होता है, उसका पूरा ट्रक एक-दो के लिए रोक दिया जाता है। यदि व्यापारी जुर्माना नहीं देता है, तो उसे धमकी दी जाती है कि उसकी दुकान पर छापा मारा जाएगा और विभाग में आपकी फाइलें और रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाएंगे।
यदि और कुछ गलती न मिले तो व्यापारी का माल चैक पोस्ट पर खोल दिया जाता है बिल से उसका मिलान किया जाता है इससे व्यापारी का समय भी बर्बाद होता है तथा उसका मानसिक उत्पीडन भी होता है साथ ही साथ चैक पोस्ट पर माल खुला पडा रहा है जिससे की माल भी खराब होता है यदि हम उच्च अधिकारीयों से सम्पर्क करते हैं तो साफ नजर आता है कि उच्च अधिकारी हमारी बात से संतुष्ट है लेकिन इन चैक पोस्ट के अधिकारियों के सामने वह भी मजबूर होते हैं हार कर व्यापारी जुर्माना भरकर अपनी जान छुडाता है एक बार जिस माल को यह अधिकारी रोक लेते हैं तो बिन जुर्माना लिये छोडते नहीं, इनका कहना होता है कि इस समय आप जुर्माना जमा करवा दो बाद में अपील में छुडवा लेना यदि अपील में ही जुर्माना छूट सकता है तो आज ही क्यों नही छोडा जाता।
अग्रवाल जी ने आगे कहा कि हमारे प्रदेश में अपील की कोई उचित व्यवस्था नहीं है अपील में कम से कम छः माह या उससे अधिक समय लगता है यदि व्यापारी जुर्माना न भरे तो इतने लम्बे समय तक उसका माल चैक पोस्ट पर सड़ता रहता है तथा उसमें चोरी का भी अंदेशा बना रहता है। हमारे प्रदेश में ट्रियूब्निल की कोई व्यवस्था नहीं है यदि व्यापारी को न्याय चाहिये तो उसके पास उच्च न्यायालय जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जिसके लिये उसे काफी पैसा व समय चाहिये दुकानदार अपनी दुकान चलाये या क्या करे अंत में वह थक हार कर जुर्माना भर देता है और चुपचाप बैठ जात है। हमारे प्रदेश में दूसरे रास्तों से या अन्य साधनों से अपंजिकृत लोगों का बहुत सा माल बिना बिल के आता है लेकिन उसपर विभाग कोई कार्यवाही नहीं करता है विभाग की मंशा रहती है कि पंजीकृत व्यापारी को ही तंग करो और उन्ही से पैसे निचोडो। इस बात पर विभाग कोई कार्य नहीं करता कि किस प्रकार पंजीकृत व्यापारीयों की संख्या बढाई जाये जिससे सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति हो और व्यापारी भी अपना कार्य आसानी से कर सके। जहां कोई गलती नहीं मिलती वहां पर व्यापारी का माल एम.आर.पी. के आधार पर रोक लिया जाता है जबकि जी.एस.टी. कानून में एम.आर.पी. की काई पाबंदी नहीं रह गई है पूरे बाजारों में व ऑन लाईन पर पटाखों पर बडी-बडी सेल लगी रहती है जोकि 50 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत तक की सेल बाजारों में लगी रहती है तो यह अधिकारी एम.आर.पी. को आधार बनाकर किस प्रकार माल को रोक सकते हैं।
हमारे जनपद में जो व्यापारी होल सेल या डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य करते हैं वह जिस समय छोटे व्यापारियों व दुकानदारों को माल भेजते हैं तो उनका माल रास्ते में रोक लिया जाता है कभी कहते हैं कि चालन है लेकिन बिल नहीं७ है बे वजह उन्हें परेशान किया जाता है फिर वह व्यापारी चैक पोस्ट के चक्कर लगाता है तथा उसका मानसिक उत्पीडन अलग से होता है। हमारी इस विषय में एक जायज मांग है की जो अधिकारी माल पकडे तो माल छोडनें का हक या तो व्यापारी के सैक्टर ऑफिसर या डी.सी स्तर के अधिकारी को होना चाहिये इससे एक तो भ्रष्टाचार मे कमी आयेगी तथा दूसरे जो अधिकारी माल को पकडता है वह अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेता है इसीलिये माल छोडने वाला अधिकारी दूसरा होना चाहिए।
दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेसोन ने कहा कि कि एक तरफ तो हमारे देश के प्रधान मंत्री व हमारे प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री Ease Of Doing Buisness तथा शिकायत प्रकोष्ठों व अलग-अलग विभागों व शिकायत के लिये मुख्यमंत्री टेलीफोन नम्बर दे रहे हैं और दूसरी ओर इस प्रकार के कुछ अधिकारी सिर्फ अपनी छवि चमकानें के लिये व अपनी जिद के लिये ईमानदार व्यापारियों को भी तंग कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों द्वारा मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल से विनम्र अनुरोध है कि उपरोक्त के संबंध में जल्द ही कोई कार्रवाई की जाए, जिस पर मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने व्यापारियों के सवालों को अच्छे से सुना और समस्या का समाधान करने का आश्वासन भी दिया।
इस दौरान दून उद्योग व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष डी.डी. अरोड़ा, पलटन बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष संतोख नागपाल, दोनों दे व्यापार मंडल के मीडिया प्रभारी राजेश बडोनी, विजय कोहली, पार्षद अजय सिंघल, संजय जैन नरेश गुप्ता विजय गोयल आदेश अग्रवाल, सुयश गर्ग सुमिल कुमार सतीश मेहता, अक्षत जैन आदि मौजूद रहे।

