मसूरी न्यूज़ (Mussoorie News) : एनजीटी ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि है भविष्य में मसूरी होटलों, गैस्ट हाऊसेस और वाहन पार्किंग की क्षमता के आधार पर पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन किया जाये और पर्यटन को नियंत्रित करने के नियम शीघ्र तय हों। संभव है जल्दी ही सरकार चारधाम की तरह मसूरी में पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के बाद शहर की क्षमता के हिसाब से पर्यटकों को प्रवेश देगी।
उत्तराखंड के पर्यटक स्थल मसूरी (Mussoorie) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. खतरे के मद्देनजर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एडवाइजरी जारी की है. एनजीटी ने कहा है कि वक्त रहते सख्त कदम नहीं उठाने पर मसूरी के हालात जोशीमठ (Joshimath) जैसे हो सकते हैं. आपको बता दें हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक मसूरी घूमने आते हैं. पर्यटकों के लिए बन रहे बेतहाशा रिसोर्ट से खतरे की आशंका है. ऐसे में एनजीटी ने मसूरी की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं.
इस पर मसूरी के पत्रकार/लेखक जयप्रकश उत्तराखंडी क्या कहते है :
पिछली 10 जनवरी को सोशल मीडिया पर प्रकाशित मेरे एक लेख को संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अभिकरण( एनजीटी) ने मसूरी में पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की सिफारिश प्रदेश सरकार से की है।
उन्होंने कहा है की मैंने लिखा था- कच्चे चूने के पहाडों पर बसे मसूरी शहर में तय संख्या से अधिक पर्यटकों और लाखों वाहनों की आवाजाही, तथाकथित पर्यटन विकास के नाम पर बनाये जा रहे वैध अवैध भवनों की बढती संख्या, भूमि, जंगल और जल स्त्रोतों के लगातार विनाश से मसूरी का हश्र भी भविष्य में जोशीमठ जैसा होने जा रहा है।
रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने मसूरी की प्राकृतिक वहन क्षमता के अध्ययन के लिए एक पैनल गठित किया था, जिसने एनजीटी से सिफारिश की मसूरी शहर को प्राकृतिक आपदा और भूधंसाव से बचाने के लिए शहर की आवासीय, ड्रिनेज सिस्टम, पेयजल आपूर्ति के आधारभूत ढांचे को देखते हुए व बचे जंगल, हरियाली जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए जरूर है कि भविष्य में पर्यटकों की संख्या सख्ती से नियंत्रित की जाये।
एनजीटी ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि है भविष्य में मसूरी होटलों, गैस्ट हाऊसेस और वाहन पार्किंग की क्षमता के आधार पर पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन किया जाये और पर्यटन को नियंत्रित करने के नियम शीघ्र तय हों। संभव है जल्दी ही सरकार चारधाम की तरह मसूरी में पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के बाद शहर की क्षमता के हिसाब से पर्यटकों को प्रवेश देगी।
उन्होंने ये भी कहा की मैं लगातार कह रहा हूँ कि अंग्रेजों के बनाये नगरीय आधारभूत ढांचे से अधिक पर्यटन मसूरी में भयानक प्राकृतिक आपदाओं को निमंत्रण देगा और इस शहर का जोशीमठ जैसा हाल होगा। अभी हाल में यूट्यूब पर ‘बुरांश’ https://www.youtube.com/@burans1981/पोडकास्टस ने मसूरी के इतिहास पर मेरी चार किश्ते जारी की थी, जिसमें मैंने नर्मो नाजुक मसूरी के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए नियंत्रित पर्यटन की वकालत की थी।
मेरे पास 19 वीं सदी के अंग्रेजी दौर के अनेक दस्तावेज मौजूद हैं,जिसमें अंग्रेज सरकार ने उस जमाने में मसूरी प्रवेश के कडे कानून बनाये हुए थे, जिसके मुताबिक शहर प्रशासन कडी जांच के बाद सिर्फ बीमार और बूढे गोरे लोगों को स्वास्थ्य आधार पर सीजन में आने का परमिट जारी करती थी, केवल हिंदुस्तानी कारीगर मजदूर मसूरी में बिना परमिट आ सकते थे।
1901 में मसूरी की कुल जनसंख्या 6451 थी, उस साल सीजन में स्थानीय मजिस्ट्रेट ने मसूरी में स्थानीय जनसंख्या के विपरीत ढाई गुना गोरे, रजवाड़ों और दूसरे पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति जारी की थी। रिकार्ड बताते हैं कि मसूरी में बिना परमिट प्रवेश करने पर भारी जुर्माना था।
अंग्रेजों ने हमें जो भव्य और खूबसूरत मसूरी दी, वह तो बीते तीन दशकों में पैसे की हवस और भ्रष्ट तंत्र ने बर्बाद कर ही दी, पर अब भी जो मसूरी बची है, उसे बचाना नयी पीढी की जिम्मेदारी है,नियंत्रित पर्यटन और बचे खुचे वन पर्यावरण को बचाना ही इसका हल है।

