हरिद्वार में संपन्न हुए महाकुंभ को लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपने वक्तव्य में थोड़ा बहुत पल्ला झाड़ते हुए मानों जैसे पूर्व मुख्यमंत्री पर ठीकरा फोड़ दिया है। हाँलाकि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा यह बात खुलकर बोलने की अपेक्षा दबे शब्दों में कही गई है। मगर उनके बयान के मुताबिक उपरोक्त घोटाले का मामला उनके कार्यकाल से पूर्व का है। अब ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री और उनके शासनकाल का जिक्र होना भी लाजिमी है। यानी कुल मिलाकर कुंभ के दौरान फर्जी टेस्टिंग का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल के दौरान हुआ है और अब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मैदान में आकर हरिद्वार कुंभ मेले में हुई फर्जी कोरोना डेथ के मामले में सरकार की कार्यवाही को सराहा है। वहीं सरकार से उन्होंने मांग करते हुए कहा है कि इस मामले में आपदा अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही को भी अंजाम दिया जाना चाहिए और यह सिर्फ आर्थिक स्तर का अपराध नहीं है बल्कि इसे लोगों के स्वास्थ्य यानी कि कुल मिलाकर जान माल का नुकसान समझा जाना चाहिए। हाँलाकि उन्होंने अपनी सरकार की तारीफों के पुल बांध कर सरकार पर विश्वसनीयता जाहिर करते हुए कहा है कि सरकार अच्छी जांच करें और जांच में अच्छे अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए इसकी पारदर्शिता सामने रखे।