चमोली: सीमांत जिले चमोली के ग्रामीण आज भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. एक तरफ देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ चमोली के दशोली ब्लॉक की निजमूला घाटी के ईराणी गांव के ग्रामीणों को सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मीलों का सफर तय करना पड़ रहा है. ईराणी गांव के मरीजों को भी स्वास्थ्य सुविधा के लिए अस्पताल तक पहुंचने में डंडी कंडी के सहारे पैदल चलकर कई मुसीबतों का सामना कर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है.
कल ईराणी गांव की 60 वर्षीय महिला शांकरी देवी पत्नी नत्थी सिंह के पेट में अचानक दर्द होने लगा। गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण महिला रात भर दर्द से कराहती रही. गांव से सड़क तक जाने के लिए पगडंडी होने के कारण रविवार को ग्रामीणों ने लकड़ी के डंडों पर बांधकर एक डोली बनाई । जिसके बाद महिला को 10 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया गया. भेल्ताना गदेरे गांव के पास होने के कारण ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर मरीज को नदी पार कर सड़क तक पहुंचाया।

यहां से महिला को निजी वाहन से जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया। जहां महिला का अस्पताल में उपचार चल रहा है।क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह नेगी,मोहन सिंह नेगी,मनबर सिंह ने कहा कि क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि पूर्व में पीएमजीएसवाई द्वारा सड़क कटिंग का कार्य किया जा चुका है।
लेकिन आज तक पुल नहीं बन सका। जिसके चलते ग्रामीण बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार कर अपने जरूरी काम से चमोली और गोपेश्वर जाते हैं।
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