देहरादून जिले के सीमांत क्षेत्र बिन्हार के अंतिम गांव मटोगी में 16 जूलाई, शुक्रवार को बड़ी धूमधाम से मनाया गया कुफ्फू पर्व | श्रावण संक्रांति पर मनाया जाने वाला हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक कुफ्फू पर्व सदियों बाद भी आस्था व परंपरा का मिश्रण बना हुआ है। ग्रामीण इस पर्व को भद्रराज देवता की आराधना से शुरू करते हैं।

जिस प्रकार गढ़वाल और कुमाऊँ में हरेला पर्व मनाया जाता है उसी प्रकार यहाँ कुफ्फू पर्व है|

इसमें गांव के एक व्यक्ति को कुफ्फू देवता का प्रतीक बनाया जाता है।  जिसका श्रृंगार अनाज की बालियों व हरे पत्तों से होता है। कुफ्फू गांव के खेतों की परिक्रमा कर भद्रराज की बावड़ी में पहुंचता है, जहां घी-मक्खन से भद्रराज की पूजा-अर्चना करने के बाद पर्व पूर्णता को प्राप्त होता है। इस परंपरा को पूरी आस्था से मनाया गया।