मसूरी , PAHAAD NEWS TEAM

मसूरी में आज बूढ़ी दीपावली बड़ी धूम धाम से मनाई गई हैं। दिवाली की शुरुआत जौनपुर की पारंपरिक संस्कृति से हुई जिसमे सभी महिलाएं अपने जौनपुरी परिधान में नजर आई और दिवाली को लेके लोगो में काफी उत्साह था। मसूरी में आज अगलाड़ यमुना घाटी विकास मंच की ओर से मंगसिर की दीवाली पर कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें हमारे सभी क्षेत्र वासियों द्वारा बढ़ चढ़ कर भाग लिया महिला शक्ति की भागीदारी ज्यादा रही किसी भी समाज में जहां महिलाएं संस्कृति की ध्वजवाहक हो उस समाज को आगे बढ़ते रहना चाइये । ग्रामीण खरीदारी करने से लेकर मुख्य व्यंजन चिवड़ा तैयार कर रहे थे । मसूरी में आज चिवड़े की महक आ रही थी । आज दीपावली में जौनपुर और जौनसार की अनूठी लोक संस्कृति से मसूरी के आंगन गुलजार हुए । जौनपुर और जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर अपनी अनूठी लोक संस्कृति के लिए पूरे देश में विख्यात है। खास बात यह है कि मसूरी की बूढ़ी दीपावली इको फ्रेंडली होती है। यहां पटाखे नही जलाए जाते हैं। प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने के साथ ही परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। आज प्रसाद के तौर पर पंचायती आंगनों में अखरोट बांटे गए । त्यौहार को देखते हुए मसूरी में आज बाजार में चहल पहल बनी हुई थी । ग्रामीण बड़ी संख्या में खरीदारी करने के लिए बाजारों की ओर उमड़ रहे थे ।

इससे पहले अगलाड़ यमुना घाटी विकास मंच के उपाध्यक्ष बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता में कैम्पटी रोड स्थित पुराने टोल चौकी के पास एक बैठक हुई थी , जिसमें 2 दिसंबर यानी आज जनजातीय बग्वाली को सर्वसम्मति से मनाने का निर्णय लिया गया था . वहीं पूरी यमुना घाटी और अगलाड़घाटी के मसूरी में रहने वाले प्रवासी कार्यक्रम में हिस्सा लिया .

बैठक में 2 दिसम्बर को पुराने टोल चौकी के समीप अगलाड़ यमुनाघाटी विकास मंच निर्माणाधीन भवन परिसर में होलियात का आयोजन किया था .आज भीमल की लकड़ी से बने होल्ले खेले गए और भिरूड़ी भी बांटी गयी । इस मौके पर पूरे जौनपुर-जौनसार व रवांई में उड़द की दाल से बने पकोड़े, साठी से बनी चिउड़ा तथा भिरूड़ी बराज के अखरोट प्रसाद के रूप में बांटे गए .

आज होलियात जलाने के बाद रासौ, तांदी व सराई नृत्यों का आयोजन किया जाएगा। जो आमतौर पर बग्वाली त्योहार में अगलाड़ व यमुनाघाटी के हर गांव में आयोजित किया जाता है। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी अपनी बहुमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और अपनी संस्कृति से अपना जुड़ाव बनाए रख सकें।