देहरादून। बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से वाहनों के अनावश्यक हॉर्न, औद्योगिक मशीनों के शोर और विभिन्न आयोजनों में तेज आवाज वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण लगाने की अपील की गई है। प्रार्थना पत्र में बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि लगातार बढ़ता शोर लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा है। इसमें दावा किया गया है कि कारखानों में कई घंटों तक मशीनों का तेज शोर सुनने से कर्मचारियों की सुनने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही तेज ध्वनि को हृदय, मस्तिष्क, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं का कारण बताया गया है।

आवेदन में गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं पर भी तेज आवाज के संभावित प्रभावों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वाहनों के हॉर्न, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों, त्योहारों और उत्सवों के दौरान बजाए जाने वाले तेज ध्वनि यंत्रों तथा पटाखों से होने वाले शोर को भी ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया है।
प्रार्थना पत्र में विशेष रूप से अत्यधिक तेज आवाज के कारण लोगों को होने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कई बार शोर इतना अधिक होता है कि लोगों को अपने कान बंद करने पड़ते हैं। आवेदन में इन्फ्रासाउंड के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
प्रशासन से मांग की गई है कि वाहनों के हॉर्न और औद्योगिक मशीनों से निकलने वाली आवाज का न्यूनतम स्तर निर्धारित किया जाए। साथ ही धार्मिक, सामाजिक और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के लिए ध्वनि संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। रात 10 बजे तक ही आयोजनों की समय सीमा निर्धारित करने और इसके बाद तेज आवाज वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने की भी अपील की गई है।
प्रार्थना पत्र में ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण करते हुए आम नागरिकों को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है।



