देहरादून: pahaadnews

माल्टा का महीना अभियान के अंतर्गत सिट्रस (संतरा वर्ग) अर्थिकी पर दून लाइब्रेरी में एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हरेला गाँव धाद की पहल पर संपन्न हुआ, जिसमें आगाज़ फेडरेशन की ओर से जगदंबा मैठाणी, कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव अजय डबराल तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. तेजपाल बिष्ट ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में स्वागत संबोधन देते हुए हरेला उद्यान के संयोजक पवन बिष्ट ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से चल रहा माल्टा का महीना अभियान इस वर्ष निर्णायक दौर में पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि यह अभियान अब समाज से लेकर शासन स्तर तक स्वीकार्यता प्राप्त कर चुका है और इसके माध्यम से इस वर्ष लगभग 12 टन माल्टा की खरीद संभव हो सकी है।

आगाज़ संस्था के संस्थापक जे. पी. मैठाणी ने जनपद चमोली में नींबू प्रजाति के फलों की खेती के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती प्रमाणिक एवं उन्नत किस्म के रोगमुक्त पौधों की उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि संतरा वर्ग के फलों के लिए न तो सरकारी और न ही निजी स्तर पर जीन बैंक विकसित किए गए हैं। उन्होंने क्षेत्र पंचायत स्तर पर माल्टा, नारंगी, कागजी नींबू, गल-गल (हिल लेमन) एवं चकोतरा जैसी प्रजातियों की उन्नत नर्सरी, खरीद और विपणन केंद्र स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. तेजपाल बिष्ट ने कहा कि सिट्रस फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन में 50 से 60 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इसके लिए रोगमुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक नर्सरी प्रणाली की कमी, उत्पादन लागत से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा सुनिश्चित खरीद व्यवस्था का अभाव प्रमुख कारण हैं। उन्होंने MSP को उत्पादन लागत से ऊपर 20–25 रुपये प्रति किलोग्राम तय करने और सरकारी व सहकारी खरीद तंत्र को सशक्त बनाने की आवश्यकता जताई।

कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव अजय डबराल ने कहा कि माल्टा को कीनू और संतरे से अलग पहचान दिलाने की जरूरत है। इसके लिए बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान उत्पादन को देखते हुए माल्टा की खरीद स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से की जाए। साथ ही, उन्होंने माल्टा को राज्य फल (स्टेट फ्रूट) का दर्जा दिए जाने की मांग भी रखी।

कार्यक्रम में जगमोहन सहाय रावत, देवेंद्र कांडपाल, संचिता अग्रवाल, देवेंद्र नेगी, हिमांशु आहूजा, संजीव कंडवाल, डी. सी. नौटियाल, तन्मय ममगाईं, जयवंती डिमरी, हिना, रोहन बिष्ट, आशा डोभाल, शिवेश द्विवेदी, गणेश उनियाल, नारायण सिंह रावत, बी. एस. रावत, मितेश नेगी, प्रमोद पसबोला और आलोक सरीन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।