देहरादून: फर्जी डॉक्टर की डिग्री बेचने वाले इमलाख के खिलाफ पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस मुजफ्फरनगर के प्रिंटिंग प्रेस से वही मशीन देहरादून लाई है, जहां फर्जी सर्टिफिकेट और डिग्री छपी थी।
इमलाख के ऑफिस से कुछ फोन और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। उसका एक खाता नंबर भी पुलिस के हाथ लगा है, जिसमें उसने 22 लाख रुपए जमा किए थे।
इस प्रिंटिंग प्रेस से नकली डिग्रियां तैयार की जाती हैं

मुजफ्फरनगर स्थित बाबा ग्रुप ऑफ कॉलेज के मालिक इमलाख और उनके भाई इमरान पर मेडिकल समेत कई कोर्स के फर्जी सर्टिफिकेट और डिग्री बेचने का आरोप है. पुलिस ने जब इन फर्जी डिग्रियों की जांच की तो पता चला कि इन्हें मुजफ्फरनगर के एक प्रिंटिंग प्रेस से तैयार किया गया है. जिस जगह पर यह मशीन लगी है, वहां एक समुदाय विशेष के बड़ी संख्या में लोग रहते हैं।
विवाद की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुजफ्फरनगर पुलिस के साथ मिलकर पहले प्रिंटिंग प्रेस मशीन को सील कर दिया था, लेकिन उसे देहरादून लाने का प्रयास नहीं किया. सबूत के तौर पर मशीन को कोर्ट में पेश किया जा सकता है।
इसे ध्यान में रखते हुए एसपी क्राइम सर्वेश पंवार शुक्रवार को खुद मुजफ्फरनगर पहुंचे और मजदूरों को लगाकर मशीन को वाहन में लोड करवाया और मशीन को देहरादून लेकर आ गए। एसपी क्राइम ने बताया कि आरोपी इमलाख के कार्यालय से चार मोबाइल, 22 लाख रुपये का खाता और कुछ दस्तावेज जब्त किये गये हैं.
एसटीएफ ने 11 जनवरी को गिरोह का भंडाफोड़ किया था
उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 11 जनवरी को फर्जी बीएएमएस डिग्री लेकर दून में क्लीनिक चलाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
जांच में पता चला कि उसने मुजफ्फरनगर स्थित बाबा ग्रुप ऑफ कॉलेज के स्वामी इमरान और इमलाख से छह से आठ लाख रुपये में फर्जी डिग्रियां तैयार कीं और उन्हें भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखंड में पंजीकृत कराया। इसके बाद दून के प्रेम नगर और रायपुर में क्लीनिक खोले गए।
प्रारंभिक जांच में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से उन 36 आरोपियों के बारे में जानकारी मांगी गई जो फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टर बनकर क्लीनिक चला रहे थे और उनमें से ज्यादातर के पास राजीव गांधी स्वास्थ्य और विज्ञान विश्वविद्यालय, कर्नाटक की डिग्री थी। जांच में नकली इस मामले में अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इमलाख और इमरान दोनों भाइयों सहित भारतीय चिकित्सा परिषद के तीन कर्मचारी व अन्य फर्जी डॉक्टर शामिल हैं।
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