मसूरी, उत्तराखंड — मसूरी वन्यजीव अभयारण्य और इसके आसपास के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में संचालित फ्लाइंग सफारी जैसी मोटरयुक्त हवाई गतिविधियाँ पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन गतिविधियों से वन्यजीवों का स्वाभाविक आवास प्रभावित हो रहा है, और यह राज्य और केंद्र सरकार की पारिस्थितिकी सुरक्षा नीतियों के प्रतिकूल है।
ध्वनि प्रदूषण और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव
वन विभाग के अनुसार, मसूरी वन्यजीव अभयारण्य में कई दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें हिमालयी मोनाल, तेंदुआ और विभिन्न प्रकार के पक्षी शामिल हैं। फ्लाइंग सफारी जैसी गतिविधियों से उत्पन्न तीव्र ध्वनि इन प्रजातियों के प्रवास, प्रजनन और भोजन के व्यवहार को प्रभावित कर रही है।
कानूनी और नीति संबंधी उल्लंघन
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी ईको-सेंसिटिव ज़ोन अधिसूचना स्पष्ट करती है कि संरक्षित क्षेत्रों के 10 किमी दायरे में किसी भी प्रकार की यंत्रीकृत वाणिज्यिक गतिविधि प्रतिबंधित है। इसके बावजूद फ्लाइंग सफारी जैसी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
इसके अलावा, यह उत्तराखंड की ईको-टूरिज्म नीति (2015) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की भावना के भी खिलाफ है, जो न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ प्रकृति-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देती है।
पूर्व चेतावनियाँ और शोध
2018 में ResearchGate पर प्रकाशित एक अध्ययन “Impacts of Tourism Development on the Physical Environment of Mussoorie” में इस क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन विकास के कारण पारिस्थितिकीय तनाव को रेखांकित किया गया था। अध्ययन में बताया गया था कि मसूरी और उसके आसपास की घाटियाँ पहले से ही जैविक रूप से संवेदनशील हैं और यहां किसी भी प्रकार की उच्च प्रभाव वाली गतिविधि दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकती है।
स्थानीय संगठनों और विशेषज्ञों की मांग
विभिन्न स्थानीय संस्थाओं, शोधकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने संबंधित विभागों से निम्नलिखित मांगें की हैं:
फ्लाइंग सफारी और अन्य उच्च-प्रभाव वाली गतिविधियों का पुनर्मूल्यांकन और पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन कराया जाए
इन्हें संरक्षित क्षेत्रों से हटाकर किसी कम संवेदनशील क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए या स्थगित किया जाए
राज्य में पारिस्थितिकी-संवेदनशील पर्यटन को प्राथमिकता दी जाए, जैसे कि नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, स्थानीय संस्कृति पर आधारित होमस्टे
स्थानीय समर्थन और चिंता
क्षेत्र के कई ग्रामीणों और स्थानीय टूर गाइड्स ने भी चिंता जताई है कि ये गतिविधियाँ न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि स्थानीय स्थायी पर्यटन व्यवसायों के अस्तित्व को भी चुनौती दे रही हैं।
आग्रह
इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग करते हुए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने उत्तराखंड पर्यटन विभाग, वन विभाग, और जिला प्रशासन से अपील की है कि वे इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी की रक्षा को प्राथमिकता दें और फ्लाइंग सफारी जैसी गतिविधियों की अनुमति पर पुनर्विचार करें।

