मसूरी : मसूरी विंटरलाइन कार्निवाल के तहत आयोजित फूड फेस्टिवल में बड़ी संख्या में सैलानी और स्थानीय नागरिक पहाड़ी खाने और अन्य व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं. वहीं इस फेस्टिवल में पहाड़ी उत्पादों, कपड़ों आदि की खूब बिक्री होती है। फेस्टिवल में जय बद्री विशाल आजीविका, देवभूमि रसोई, खोपचे, न्यू दून स्पाइस हास्पिलिटी, मिस्टर वेज, क्लब महिंद्रा, द टिक्का टैरेस, उडिपी कैफे, वैलकम सवाय, देवभूमि यूनिवर्सिटी, बदमाश कबाब, प्यारी पहाड़न, हिमालया ट्री, ब्रेटवुड होटल, गढवाल सभा, क्वांटम यूनिवर्सिटी, राजस्थानी फूड, स्वदेश कुटुंब सहित पहाड़ी उत्पादों के कई स्टॉल लगे हैं।
मालरोड पर विंटर लाइन के तहत आयोजित फूड फेस्टिवल में पर्यटकों ने पहाड़ी खाने का लुत्फ उठाया। दिल्ली से आए पर्यटक सुखविंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने पहली बार पहाड़ी खाना खाया है, जिसका स्वाद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि ऐसे व्यंजन हर जगह परोसे जाने चाहिए। खासकर दाल पकौड़ी और हरी चटनी के साथ खाने का अलग ही मजा है. साथ ही झगोरे की खीर का स्वाद ही अलग होता है.
फूड फेस्टिवल में गढ़वाल सभा ने पहाड़ी पकौड़ी और दाल स्वांले का स्टॉल लगाया है जहां पर्यटक बड़ी संख्या में इसका लुत्फ उठा रहे हैं. गढ़वाल सभा की सुनीता रणावत ने कहा कि पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग उड़द दाल के पकौड़े और भरवां हंसले का लुत्फ उठा रहे हैं और प्रतिक्रिया बहुत अच्छी मिल रही है.

इस मौके पर क्लब महिंद्रा के मैनेजर अभिषेक ने कहा कि पर्यटकों को पहाड़ी खाना बहुत पसंद आता है। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था ने यहां पहाड़ी व्यंजन लगाए हैं, जिसमें गहथ की दाल का सूरमा, पहाड़ी मूली, भटट व कंडाली के कबाब, भांग मुर्ग एवं जखिया मच्छी के पकोडे़, झगोरे की खीर आदि परोसी जाती है, जो लोगों के बीच लोकप्रिय है।
वहीं प्यारी पहाड़न की स्टॉल संचालक प्रीति मंदोलिया ने कहा कि हमारे स्टॉल पर पूरे पहाड़ के पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं. इसके साथ ही युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए चाइनीज फूड मोमोज और स्प्रिंग रोल को मडुवे के आटे से बनाकर परोसा जा रहा है, जो काफी लोकप्रिय हो रहा है. उन्होंने कहा कि मैडुवे चाय काफी लोगों को आकर्षित कर रही है और इसका स्वाद काफी पसंद किया जा रहा है.
द वैलकम सवाय के सैफ प्रकाश नेगी ने बताया कि उनकी संस्था ने भूनी भात, कुकड़ी का शिकार, माछा भात के साथ-साथ पहाड़ी खाना परोसा है जो लोगों को बहुत पसंद आता है. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्थानीय उत्पादों को महत्व देते हैं जिससे किसानों को लाभ होता है। उन्होंने कहा कि गहत का सोरबा, वहीं मीठे में चुल्लू व तिमले का केक व कोदे के बिस्कुट रखे जाते हैं. आने वाले ग्राहक खाने की तारीफ कर रहे हैं। गढ़वाल सभा के स्टॉल पर नमिता कुमाई ने कहा कि 100 प्रतिशत पर्यटक स्वालें और पकोड़ों विशेष रूप से पसंद करते हैं। वहीं पर्यटकों को भी मंडवे के मोमो खूब पसंद आ रहे हैं.

