देहरादून।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की, जिसमें भगत सिंह कोश्यारी का नाम सार्वजनिक जीवन और राजनीति के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए शामिल किया गया।
भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्होंने राज्य निर्माण के बाद प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें यह सम्मान दशकों से चली आ रही उनकी निष्ठावान सार्वजनिक सेवा, प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक योगदान के लिए दिया गया है।
राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन का लंबा सफर
भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री रहे हैं। इसके अलावा वे कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर रहे, जिनमें—
- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
- राज्यसभा सांसद
- लोकसभा सांसद (नैनीताल–उधम सिंह नगर)
- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता
- महाराष्ट्र के राज्यपाल (2019–2023)
उनका राजनीतिक जीवन सादगी, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता है। महाराष्ट्र के राज्यपाल रहते हुए भी उन्होंने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
उत्तराखंड में खुशी की लहर
भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने की खबर के बाद उत्तराखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रदेश के राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें बधाई दी है। कई लोगों ने इसे देवभूमि उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री, मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने कहा कि यह सम्मान न केवल भगत सिंह कोश्यारी के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है।
पद्म भूषण पुरस्कार का महत्व
पद्म भूषण भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा प्रदान की हो। हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कारों की घोषणा की जाती है।


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