टिहरी/कैम्पटी। मसूरी के समीप कैम्पटी क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है। प्राधिकरण ने दो भवनों को सील कर दिया, जबकि स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
प्राधिकरण, धनोल्टी द्वारा जारी आदेश के अनुसार मसूरी–कैम्पटी फॉल मार्ग पर सड़क के बांयी ओर स्थित सचिन (ठेकेदार) और विनोद राणा के भवनों पर बिना अनुमति निर्माण का आरोप था। मामले में उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 (संशोधित 2013) के तहत पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई के बाद निर्माण अवैध पाए जाने पर दोनों भवनों को सील करने की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी सीलिंग की कोशिश की गई थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल न होने और भीड़ के कारण कार्रवाई टल गई थी। इस बार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई पूरी की गई।
स्थानीय लोगों में रोष, लगाए गंभीर आरोप
कार्रवाई के बाद कैम्पटी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। स्थानीय निवासियों और प्रभावित पक्षों का आरोप है कि विभाग चुनिंदा लोगों को निशाना बना रहा है, जबकि अन्य अवैध निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन पर मेहनत से निर्माण कर आजीविका का साधन तैयार किया है, लेकिन प्रशासन उनके खिलाफ सख्ती बरत रहा है।
कुछ लोगों ने प्राधिकरण के सहायक अभियंता दिग्विजय तिवारी पर भी आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के जरिए निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित लोगों पर ही केंद्रित है।
प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, एसडीएम धनोल्टी नीलू चावला ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों और सरकारी गाइडलाइन के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित भवनों की विधिवत सुनवाई के बाद ही उन्हें अवैध घोषित कर सील किया गया।
एसडीएम ने चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माण को स्वयं नहीं हटाया गया, तो आगे चलकर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई भी की जा सकती है। साथ ही, क्षेत्र में अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
मामले ने लिया राजनीतिक रूप
इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। कुछ प्रभावित लोगों का दावा है कि वे सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जिसे वे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कार्रवाई को निष्पक्ष बताया है।
आगे क्या?
कैम्पटी क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई अब बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का विरोध तेज होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई और विरोध की संभावना जताई जा रही है।

