मसूरी : मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी एक पर्यटन स्थल है और अगर यहां पीने के पानी की कमी होती है तो इसका सीधा असर मसूरी और प्रदेश के पर्यटन पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार को एनजीटी के निर्देशों का पालन करना चाहिए और एनजीटी के निर्देशों के खिलाफ अपील या पुनरीक्षण दायर करना चाहिए ताकि मसूरी को पीने के पानी की आपूर्ति की जा सके।

उन्होंने कहा कि 144 करोड़ रुपये की मसूरी यमुना पेयजल योजना के तहत मसूरी में बिछाई जा रही पेयजल पाइप लाइन के कार्य में भी तेजी लाई जाए ताकि मसूरी में पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले यमुना का पानी मसूरी में उपलब्ध कराया जा सके.

मसूरी में 322 पंजीकृत होटल हैं, 245 पंजीकृत होम स्टे हैं, अनगिनित गेस्ट हाउस हैं और लगभग 5600 उत्तराखंड जल संसथान के उपभोगता हैं।

मसूरी में 14 MLD पानी की आवश्यकता रहती है और उत्तराखंड जल संसथान, मसूरी के पास सिर्फ 7 MLD पानी की उपलब्धता है जिसको वह कनेक्शन द्वारा उपभोगताओं को देते हैं । बाकी 7 MLD पानी की उपलभ्धता मसूरी के आस पास के पानी के प्राकर्तिक श्रोतों से निजी पानी के टैंकर द्वारा होती आई है और होती रही है। इसी प्रकार से मसूरी में पूर्ण रूप से रिहाइशी और व्यवसायिक उपभोगताओं को पानी की पूर्ती होती हैं ।

हाल ही में 12.01.2023 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली, द्वारा निर्देश देते हुए मसूरी में झील के निकट एक प्राकृतिक पानी के श्रोत से पानी लेने पर एकाएक रोक लगा दी गयी है जो मसूरी के उपभोगताओं, रिहाइशी और व्यवसायिक सभी के लिए परेशानी है और उत्पीड़न है ।

ऐसे निर्देश से समस्त मसूरी निवासियों में भय का माहौल है और साथ में पानी न मिलना मानव अधिकार का हनन है ।

आयोग से निवेदन है की वह जल्द से जल्द हस्तक्षेप करके पानी की पूर्ती में आयी रुकावट को दूर करने का प्रयास करें और सभी मसूरी निवासियों को उनका मानव अधिकार जल्द से जल्द दिलाएं।

उम्मीद है मसूरी के नागरिकों को आयोग उनका मानव अधिकार अवश्य पूर्ण रूप से दिलाएगा।

इस अवसर पर मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ,जगजीत कुक्रेजा ,नागेन्द्र उनियाल आदि लोग उपस्थित थे।

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