मसूरी , PAHAAD NEWS TEAM

म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (एमपीजी कॉलेज) के प्राध्यापकों की पदोन्नति का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए मसूरी पालिका अध्यक्ष, प्रबंध समिति समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है.

आपको बता दें कि मसूरी एमपीजी कॉलेज के प्रोफेसरों और पालिका की प्रबंध समिति के अध्यक्ष के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पिछले तीन साल से कई प्रोफेसरों की प्रोन्नति लंबित है। डॉ ललित मोहन उपाध्याय, डॉ प्रमोद भारतीय, डॉ वीपी जोशी और अमिताभ भट्ट की पदोन्नति नगर प्रबंधन समिति और पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता के अड़ियल रवैये के कारण रुकी हुई है। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक प्रगति बाधित हो रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

डॉ ललित मोहन उपाध्याय अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिका के संपादक भी हैं। वह कॉलेज में गणित विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और अध्यक्ष हैं। आज से तीन वर्ष पूर्व चयन समिति ने प्राध्यापक पद के लिए अपनी संस्तुति दे दी थी, परन्तु दुर्भावना से महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने निदेशक, उच्च शिक्षा, उत्तराखंड को अनुशंसा आज तक नहीं भेजी। डॉ. प्रमोद भारतीय कॉलेज के संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और चेयरपर्सन हैं। उन्होंने भी दो साल पहले ही प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनके आवेदन पर भी अध्यक्ष, प्रबंध समिति ने चुप्पी साध ली है.

वहीं, राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर और अध्यक्ष अमिताभ भट्ट ने भी एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनके आवेदन को भी अध्यक्ष, प्रबंध समिति द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। वाणिज्य विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ वीपी जोशी ने भी एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनके आवेदन पर आज तक विचार नहीं किया गया है.

इस मामले में जब नाराज शिक्षकों ने अपनी बात रखी तो प्राचार्य ने कहा कि अध्यक्ष ने पदोन्नति समेत कई मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. अध्यक्ष के रवैये से नाराज डॉ. वीपी जोशी ने हाईकोर्ट नैनीताल का रुख किया. इस मामले में हाईकोर्ट ने अध्यक्ष, प्रबंध समिति समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया है. साथ ही 6 हफ्ते के अंदर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं.